केन्द्र सरकार से पैसा अटका, सीईटीपी प्लांट तीन साल से लटका...अब प्रदूषण मंडल ने कोर्ट से दिया झटका

- नहीं मिली किश्त, मंझधार में सांगानेर छपाई उद्योग की कश्ती

- राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने एसईपीडी और 10 निदेशकों के खिलाफ कोर्ट में दर्ज कराया मुकदमा

- 300 साल पुराने छपाई व्यवसाय पर पैदा हुआ खतरा, 4 लाख लोगों के रोजगार पर भी संकट


जस्ट टुडे
जयपुर।
सांगानेर की पहचान और आर्थिक विकास के प्रमुख केन्द्र बिन्दु सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई व्यवसाय के अस्तित्व पर इन दिनों संकट खड़ा हो गया है। राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने एसईपीडी और उसके 10 निदेशकों के खिलाफ मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट जयपुर महानगर (प्रथम) के यहां मामला दर्ज कराया है। वहीं एसईपीडी के निदेशकों का कहना है कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है। वे तो काफी वर्षों से रंगाई-छपाई व्यवसाय को चलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनका कहना है कि राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के इस रवैये से करीब 300 साल पुराने सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई व्यवसाय पर खतरा उत्पन्न हो गया है। करीब 3000 करोड़ रुपए की इस इंडस्ट्री से 3-4 लाख लोगों को रोजगार मिला हुआ है। अभी वर्तमान में सांगानेर में रंगाई-छपाई की 900 इंडस्ट्रीज हैं। ऐसे में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की इस कार्रवाई से इस उद्योग से जुड़े सभी लोग सकते में हैं। कोर्ट में केस होने के बाद एसईपीडी के दो डायरेक्टर्स तो इस्तीफा भी दे चुके हैं। 

केन्द्र की द्वितीय किश्त नहीं मिलने से अटका काम, इनका बदनाम हो रहा नाम

दरअसल, रंगाई-छपाई व्यवसाय को इण्डस्ट्रीज का दर्जा दिलाने और सांगानेर को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए सांगानेर एनवायरो प्रोजेक्ट डवलपमेंट (एसईपीडी) का गठन किया गया था। इस ईकाई को कॉमन एफिलेंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) बनाने की जिम्मेदारी दी गई। जिससे रंगाई-छपाई फैक्ट्रियों से निकलने वाले प्रदूषित जल को साफ किया जा सके। सीईटीपी प्लांट को केन्द्र सरकार, राज्य सरकार और रंगाई-छपाई इण्डस्ट्री मालिकों की ओर से तय हिस्सेदारी के तहत बनवाया जा रहा है। इस पर करीब 159 करोड़ रुपए खर्च प्रस्तावित है। अभी तक इस पर करीब 130 करोड़ रुपए खर्च भी हो चुके हैं। इसमें से सर्वाधिक 50 फीसदी हिस्सा केन्द्र सरकार की ओर से देना प्रस्तावित है। वहीं करीब 25-25 फीसदी पैसा राज्य सरकार और इंडस्ट्री मालिक के हिस्से का है। इस हिस्सेदारी में से राज्य सरकार करीब 39.75 करोड़ रुपए और करीब 50 करोड़ रुपए इंडस्ट्री मालिक दे चुके हैं। केन्द्र की हिस्सेदारी में से प्रथम किश्त करीब 37.5 करोड़ रुपए भी आ चुके हैं। वहीं द्वितीय किश्त करीब 22.5 करोड़ रुपए अभी तक नहीं मिली है। केन्द्र की द्वितीय किश्त नहीं मिलने से सीईटीपी प्लांट की करीब 5-6 किमी. लाइन का कार्य तीन साल से अधूरा है। इसी को लेकर राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने एसईपीडी को कई नोटिस भी दिए। चूंकि, लाइन का पूरा कार्य केन्द्र की द्वितीय किश्त नहीं मिलने से अटका पड़ा है, ऐसे में एसईपीडी इसमें कुछ भी नहीं कर सकती है। अब भी प्लांट का कार्य अधूरा होने से प्रदूषण मंडल ने एसईपीडी निदेशकों पर कोर्ट में केस कर दिया है। 

इन निदेशकों के खिलाफ हुआ मुकदमा

देवी शंकर खत्री, राजेन्द्र जिंदगर, चेतन दास खत्री, प्रवीण शाह, घनश्याम कूलवाल, जयंती लाल पटेल, चमत्कार जैन, संजय शर्मा, नवरतन नराणियां और महेश झालानी।

प्रदूषण मंडल ने अर्जी में यह कहा 

मुख्य महानगर मजिस्ट्रेट जयपुर महानगर (प्रथम) के समक्ष दिए गए परिवाद में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने कहा है कि सांगानेर एनवायरो प्रोजेक्ट डवलपमेंट (एसईपीडी) ने जल  (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम 1974 का उल्लंघन किया है। इसमें कहा गया है कि यदि कोई अपराध कम्पनी की ओर से किया जाता है तो उसके पदाधिकारी उसके जिम्मेदार होंगे। ऐसे में एसईपीडी कम्पनी और उसके निदेशकों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही कर अभियुक्तगणों को कठोरतम दण्ड से दण्डित करने के आदेश पारित कराने की कृपा करावें। परिवाद में कहा गया है कि एसईपीडी को कई बार सीईटीपी प्लांट के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द पूरा कर फैक्ट्रियों का गंदा पानी उसमें साफ करने की बार-बार हिदायत दी गई। लेकिन, ऐसा नहीं होने पर मंडल ने 29.8. 2019, 7.7. 2020 और 17.8.2021 को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए गए। इसके बाद भी जल अधिनियम की अवहेलना की जा रही है। 

एसईपीडी और निदेशकों का नहीं है कोई दोष

सांगानेर कपड़ा रंगाई-छपाई एसोसिएशन के सचिव और एसईपीडी के निदेशक राजेन्द्र जिंदगर ने बताया कि हम सभी इस व्यवसाय को बचाने और आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयासरत हैं। केन्द्र सरकार की ओर से मिलने वाली द्वितीय किश्त तीन साल बाद भी एसईपीडी को नहीं मिली है। ऐसे में ठेकेदार ने पिछले दो वर्ष से कार्य रोक रखा है। वहीं एसईपीडी के हिस्से आने वाली कुल राशि से भी करीब 7-8 करोड़ रुपए ज्यादा ठेकेदार को दिए जा चुके हैं। केन्द्र से द्वितीय किश्त मिलने के बाद ही यह प्लांट पूरा हो सकता है। इसमें एसईपीडी या फिर निदेशक कुछ भी नहीं कर सकते हैं। इस सच्चाई से राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल भी वाकिफ है। फिर भी मंडल की यह कार्रवाई समझ से परे है। 




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