रातल्या गांव में ट्यूबवैल पर जिम्मेदारों ने फेरा पानी

- ग्राम पंचायत जगन्नाथपुरा के राजस्व गांव रातल्या में मार्च 2019 में खुदवाया गया था सांसद कोष से ट्यूबवैल, 15 दिन बाद ही जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों ने निकाल लिया सामान, तभी से बंद है ट्यूबवैल

- कार्यवाही करने के नाम पर जिम्मेदार कर रहे टालमटोल, प्रशासन ने भी मूंदी आंख


जस्ट टुडे
जयपुर।
एक तरफ तो सरकार जल जीवन मिशन के तहत गांव-ढाणियों में पेयजल की व्यवस्था करने को कह रही है। वहीं कई पंचायत प्रतिनिधि ट्यूबवैल को ही बंद करके बैठे हुए हैं। ऐसे में ग्रामीण पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं। आश्चर्यजनक बात यह है कि बीसलपुर पेयजल का मुख्य टैंक गांव से सिर्फ आधा किमी. ही दूर है, फिर भी गांव में बीसलपुर पेयजल लाइन नहीं पहुंची है। इससे भी ज्यादा चौंकाऊ बात यह है कि गांव में सांसद रामचरण बोहरा के कोष से करीब 5 लाख रुपए की लागत से मार्च 2019 में ट्यूबवैल खुदवाया गया था। लेकिन, 15 दिन बाद ही जिम्मेदार पूर्व उपसरपंच ने ट्यूबवैल से पाइप, मोटर और स्टार्टर सहित अन्य सामान निकाल अपने घर पर रख लिया। तभी से अभी तक ट्यूबवैल बंद है। पंचायत प्रतिनिधियों के गैर जिम्मेदारना रवैये के चलते ग्रामीण पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पंचायत प्रतिनिधियों ने जल्द ही इस पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया तो फिर कोर्ट में मामला दर्ज कराया जाएगा।

यह है मामला

दरअसल, मामला ग्राम पंचायत जगन्नाथपुरा के राजस्व गांव रातल्या का है। यहां डिग्गी मालपुरा रोड मुख्य हाइवे पर मार्च 2019 में सांसद रामचरण बोहरा के कोष से करीब 5 लाख रुपए की लागत से ट्यूबवैल खुदवाया गया था। ग्रामीणों ने बताया कि ट्यूबवैल लगने के करीब 15 दिन बाद पूर्व उपसरपंच प्रतिनिधि ने मोटर, पाइप, स्टार्टर सहित अन्य आवश्यक सामान निकाल लिया। स्थानीय ग्रामीणों ने इसकी शिकायत लिखित में ग्राम पंचायत से भी की। इसके बाद भी पूर्व सरपंच और सचिव की ओर से कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। 

एक पेयजल टंकी के भरोसे ग्रामीण

रातल्या गांव में करीब 150 परिवार रहते हैं। सभी किसान और पशुपालक भी हैं। ऐसे में पेयजल और दैनिक उपभोग के अलावा मवेशियों और खेती में भी पानी की जरूरत रहती है। अभी गांव में पेयजल के लिए टंकी बनी हुई है। इसमें से दिनभर में एक बार ही आपूर्ति की जाती है, जो ग्रामीणों की जरूरत के हिसाब से नाकाफी है। यदि यह ट्यूबवैल शुरू हो जाती है तो फिर मवेशियों और राहगीरों को पेयजल के लिए नहीं भटकना पड़ेगा। क्योंकि, यह ट्यूबवैल गांव के मुख्य हाइवे पर है, जहां से रोजाना सैकड़ों राहगीर और ग्रामीण गुजरते हैं। ट्यूबवैल शुरू होने से स्थानीय ग्रामीणों के साथ ही आस-पास के लोगों को भी पेयजल की समस्या से निजात मिल सकेगी। 

मिलीभगत की बू

ग्रामीणों ने निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि अशोक चौधरी को भी इसकी शिकायत की। इस पर सरपंच प्रतिनिधि ने विकास अधिकारी से ग्राम पंचायत के नाम प्रार्थना-पत्र जारी करवाने को कहा। सरपंच प्रतिनिधि ने कहा कि प्रार्थना-पत्र मिलते ही कार्यवाही की जाएगी। ग्रामीणों ने शिकायती पत्र विकास अधिकारी को दिया। इस पर कार्यवाही करते हुए विकास अधिकारी ने सरपंच अशोक चौधरी और सचिव श्याम सुन्दर सिंघल को जांच करने के निर्देश दिए। लेकिन, दोनों जिम्मेदारों ने शिकायती पत्र खो जाने और समायोजन नहीं होने की बात कहकर ग्रामीणों को फिर से विकास अधिकारी के पास जाकर कार्यवाही कराने को कहा। दोनों जनप्रतिनिधियों की इस कार्यशैली से मिलीभगत की बू आ रही है। 

ट्यूबवैल में पानी कम होने से निकाला सामान

सासंद कोष से ट्यूबवैल खुदवाया गया था, ट्यूबवैल में पानी की कमी को देखते हुए पाइप, मोटर सहित अन्य सामान पूर्व उपसरपंच प्रतिनिधि के यहां रखे हुए हैं। सामान जमा कराने पर यदि ग्राम पंचायत रसीद देगा तो सामान जमा करवा दिया जाएगा। - पोखरमल मौर्य, पूर्व सरपंच

...तो दर्ज कराएंगे मुकदमा

ग्रामीणों की ओर से इस सम्बंध में लिखित में शिकायत की गई है। वहीं सरपंच ग्राम पंचायत जगन्नाथपुरा द्वारा मौखिक रूप से भी मुझे अवगत करवा दिया गया है। कमेटी बनाकर जल्द ही कार्यवाही की जाएगी। बिना अनुमति सामान निकाल लिया गया एवं पंचायत समिति को अवगत नहीं कराया गया। अब ट्यूबवैल सम्बंधी सामान को वापस निकलवाया जाएगा, जरूरत पड़ी तो मुकदमा भी दर्ज करवाया जाएगा।
- बाबूलाल मीणा, अतिरिक्त विकास अधिकारी

कार्यवाही पंचायत समिति ही करेगी

ग्रामीणों की ओर से कार्यवाही करने के लिए ग्राम पंचायत में प्रार्थना-पत्र दिया गया है। ट्यूबवैल से पाइप व अन्य सामान पूर्व सरपंच व उपसरपंच द्वारा निकाल लिए गए। ट्यूबवैल 2019 में सासंद कोष से खुदवाया गया था। कार्यकारी एजेंसी पंचायत समिति सांगानेर को बनाया गया था, ऐसे में कार्यवाही पंचायत समिति ही करेगी।
- अशोक चौधरी, सरपंच प्रतिनिधि

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