जयपुर के बाजार हुए गुलजार, सांगानेर बाजार अब भी बेजार

 - पिछले 5 साल से सांगानेर बाजार में नहीं हो रही सजावट, दोनों व्यापार महासंघ निष्क्रिय

- काली दीपावली मनाने को मजबूर सांगानेर बाजार के व्यापारी, ग्राहकों का हो रहा मोहभंग

जस्ट टुडे
जयपुर।
दीपावली पर शहर के हर बाजार रंगीन रोशनी से नहाए हुए हैं और ग्राहकों के स्वागत में सजे हुए हैं। वहीं सांगानेर बाजार के व्यापारी पिछले पांच साल से काली दीपावली मनाने को मजबूर हैं। व्यापारियों की मानें तो बाजार में पिछले पांच साल से रोशनी नहीं हो रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि देश-विदेश में मशहूर सांगानेर बाजार एकमात्र ऐसा होगा, जहां पर दीपावली पर भी रोशनी नहीं होती है। यहां पर कहने को तो दो व्यापार महासंघ हैं, लेकिन व्यापारियों और बाजार के हितों पर दोनों चुप्पी साध लेते हैं। दोनों व्यापार महासंघ निष्क्रिय हैं। दोनों व्यापार महासंघों के पदाधिकारी सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने की जद्दोजहद में रहते हैं, इन्हें बाजार की दुर्दशा से कोई सरोकार नहीं है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि बाजार में ना साफ-सफाई की माकूल व्यवस्था है और ना ही पार्किंग की उचित जगह। व्यापार महासंघों के निष्क्रिय रहने से ट्रैफिक पुलिस भी ग्राहकों के वाहनों को उठाकर ले जाती है, जिससे ग्राहक सांगानेर बाजार में आने से कतराने लगा है। जगह-जगह अतिक्रमणों ने बाजार की सांस घोंट रखी है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि मुख्य मार्ग के अस्थायी अतिक्रमण तो सभी को दिख जाते हैं। लेकिन, गलियों में स्थाई अतिक्रमण पर कोई बात नहीं करता है। सबसे पहले गलियों में हो रखे स्थाई अतिक्रमण पर कार्रवाई की जाए, उसके बाद मुख्य मार्गों पर स्थित अतिक्रमण को हटाया जाए। 

नया अध्यक्ष बनने पर ही बदलेगी सांगानेर बाजार की किस्मत: बच्चानी

व्यापार महासंघ, सांगानेर के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष उत्तम चंद बच्चानी ने बताया कि पिछले पांच साल से सांगानेर बाजार में रोशनी नहीं हो रही है। दीपावली पर जहां सारे बाजार दमकते हैं, वहीं सांगानेर बाजार में अंधेरा पसरा रहता है। सांगानेर की इस दयनीय स्थिति के चलते अब ग्राहक भी दूसरे बाजारों में जाने लग गया है। बच्चानी ने बताया कि व्यापार महासंघ, सांगानेर अब पूरी तरह निष्क्रिय है। यह व्यापारियों और बाजार के हितों की तरफ इनका कोई ध्यान नहीं है। पांच साल पहले लगातार दो साल तक रोशनी की गई थी। अब व्यापार महासंघों की निष्क्रियता के चलते अब सांगानेर बाजार के व्यापारी काली दीपावली मनाने को मजबूर हैं। व्यापार महासंघ, सांगानेर का कार्यकाल खत्म हो चुका है। वर्तमान में ना तो कोई अध्यक्ष है और ना ही कोई अन्य पदाधिकारी। सांगानेर में जब तक नया अध्यक्ष नहीं बनेगा, तब तक व्यापारी काली दीपावली ही मनाने को मजबूर होंगे। यदि सांगानेर की दुर्दशा सुधारनी है तो अध्यक्ष नया बनाना पड़ेगा। सांगानेर में किसी ने भी व्यापारियों की दुकानों का समय बढ़ाने की पैरवी नहीं की। हम सभी व्यापारी एकत्रित होकर सांगानेर विधानसभा में कांग्रेस नेता पुष्पेन्द्र भारद्वाज के पास गए, तब जाकर दुकानों का समय रात 10 बजे तक किया गया। त्योहारी सीजन में व्यापारियों के लिए यही बड़ी उपलब्धि रही। 

जब तक नया व्यापार महासंघ नहीं बनेगा तब तक काली दीपावली मनाने को मजबूर व्यापारी: बुलचंदानी

सांगानेर के व्यापारी जयप्रकाश बुलचंदानी ने बताया कि सांगानेर बाजार में दोनों व्यापार महासंघ निष्क्रिय है। दोनों का कार्यकाल खत्म हुए काफी समय हो चुका है। उसके बाद भी अभी तक चुनाव नहीं करवाए गए हैं। क्योंकि, सभी अध्यक्ष बनना चाहते हैं। लेकिन, अब व्यापारी जान चुके हैं, ऐसे में अब अध्यक्ष वही बनेगा, जिसे व्यापारी चाहेंगे। ऐसे में कोई भी चुनाव कराने की रिस्क नहीं ले रहा है और अपना रुतबा चलाने के लिए स्वघोषित अध्यक्ष बने हुए हैं, जबकि असलियत में सांगानेर बाजार में वर्तमान में कोई अध्यक्ष है ही नहीं। क्योंकि, दोनों व्यापार महासंघों का कार्यकाल खत्म हुए काफी समय बीत चुका है। सांगानेर बाजार एकमात्र ऐसा बाजार है, जहां पर दीपावली पर भी रोशनी नहीं की जा रही है। बाजार में ना कोई सुविधा है और ना ही पार्किंग की उचित जगह। सांगानेर की बदहाल स्थिति के चलते अब ग्राहक भी धीरे-धीरे रामपुरा रोड बाजार और मानसरोवर के बाजार सहित कई अन्य बाजारों का रुख करने लग गया है। सांगानेर में जब तक नया व्यापार महासंघ नहीं बनेगा, तब तक ना तो यहां सुविधाएं होंगी और ना ही दीपावली पर कोई सजावट होगी। 

व्यापारी नहीं देते सजावट के लिए पैसा: टोडावत


व्यापार महासंघ, सांगानेर के पूर्व उपाध्यक्ष बाबूलाल टोडावत ने जस्ट टुडे को बताया कि सांगानेर बाजार के व्यापारी रुपए ही नहीं देते हैं तो फिर सजावट कैसे की जाए। इस पर जस्ट टुडे ने पूछा कि व्यापारी रुपए क्यों नहीं देते हैं, क्या व्यापार महासंघ, सांगानेर की व्यापारियों पर पकड़  नहीं है या फिर व्यापारी उन पर विश्वास नहीं करते हैं। इस पर टोडावत ने बताया कि व्यापार महासंघ की व्यापारियों पर तो पूरी पकड़ है। हालांकि, उन्होंने कहा कि कुछ व्यापारी सजावट के रुपए नहीं देते हैं। जस्ट टुडे ने पूछा कि अन्य बाजारों में कैसे व्यापारी महासंघों को सजावट के लिए रुपए दे देते हैं और यहां क्यों नहीं देते हैंï? इस पर टोडावत ने कहा कि हम जब व्यापारियों से पैसे मांगने जाते हैं तो वे 500 रुपए भी नहीं देते हैं। जस्ट टुडे ने पूछा कि क्या इस बार आप लोगों ने सजावट के लिए व्यापारियों से बात की। इस पर टोडावत ने कहा कि तीन साल पहले व्यापारियों के पास गए थे, उन्होंने पैसे देने से मना कर दिया। इस पर जस्ट टुडे ने कहा कि इसका मतलब तो व्यापार महासंघ की व्यापारियों पर पकड़ नहीं है? इस पर टोडावत ने कहा कि सारे पैसे व्यापार महासंघ थोड़े ही भुगतेगा। इस पर जस्ट टुडे ने पूछा कि  बाजार में जब रोशनी की गई थी, तब पदाधिकारियों ने कितने पैसे दिए थे और जो गेट बने थे, उन पर विज्ञापनों से कितनी आय हुई थी, इस पर टोडावत कोई उचित जवाब नहीं दे पाए।


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