जरूरतमंदों को मिला 'संतोष'

- सांगानेर के ताम्बी परिवार ने समाज में पेश की नजीर, पिता की आत्मा की शांति के लिए जरूरतमंदों को बांटा राशन


जस्ट टुडे
जयपुर।
धन तो बहुत लोगों के पास होता है, लेकिन, उसका सदुपयोग करना बहुत कम लोगों को आता है। सांगानेर निवासी संतोष ताम्बी ने धन का सदुपयोग कर ना केवल मानव सेवा की है बल्कि दूसरे लोगों के लिए नजीर भी पेश की है। उनके इस कार्य ने समाज में चल रही फिजूलखर्ची और दिखावे को आईना दिखाया है, वहीं इससे फिर साबित हुआ कि 'संतोष' ही सबसे बड़ा धन है। जरूरतमंदों की मदद करके संतोष को असल में 'संतोष' प्राप्त हुआ। 

100 जरूरतमंदों को बांटी राशन सामग्री

दरअसल, संतोष ताम्बी के पिता का अभी हाल ही में निधन हो गया था। ऐसे में ताम्बी परिवार ने समाचार-पत्रों में बड़े-बड़े विज्ञापन सहित किसी भी प्रकार की फिजूलखर्ची नहीं करने का निर्णय लिया। उन्होंने इस पैसे का सदुपयोग करते हुए कोरोना काल में जरूरतमंदों की मदद करने का बीड़ा उठाया। इसके लिए उन्होंने मानव सेवार्थ, परहितार्थ ग्रुप के जरिए करीब 100 जरूरतमंदों को गुरुवार को राशन सामग्री दिलवाई। ताम्बी का कहना है कि मुझे विश्वास है कि मेरे इस छोटे से प्रयास से पिता की आत्मा को जरूर खुशी मिलेगी। 

प्रेरणादाई है प्रयास

ग्रुप के संयोजक घनश्याम कूलवाल ने बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सतीश वासवानी को जरूरतमंद परिवारों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद ताम्बी परिवार की ओर से करीब 100 जरूरतमंदों को राशन सामग्री दी गई। यह प्रयास प्रेरणादाई है। 

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