सांगानेर अस्पताल को पार्षद दिव्या सिंह जल्द देंगी सोनोग्राफी मशीन की सौगात

 - व्यापारियों के वैक्सीनेशन के दौरान वार्ड 93 पार्षद दिव्या सिंह और उनके पिता संजय सिंह गुर्जर ने महसूस किया गर्भवतियों का दर्द...और सोनोग्राफी मशीन देने का लिया फैसला 


जस्ट टुडे
जयपुर।
उम्र भर कमाया पैसा खत्म हो सकता है, लेकिन जो दुआएं इनकी सेवा करने से मिलेगी, वो कभी खत्म नहीं हो सकती। समाज-सेवा का कुछ ऐसा ही जज्बा दिखाया है ग्रेटर नगर निगम की पार्षद दिव्या सिंह ने। गर्भवतियों की परेशानी को देखते हुए पार्षद दिव्या सिंह ने मंगलवार को सांगानेर स्थित सैटेलाइट अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन लगाने की घोषणा की है। पार्षद दिव्या सिंह को सोनोग्राफी मशीन लगाने की प्रेरणा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और उनके पिता संजय सिंह गुर्जर से मिली है। पार्षद की ओर से मशीन लगने से गर्भवतियों को अब प्राइवेट लैब में महंगे दामों पर सोनोग्राफी नहीं करानी पड़ेगी। 

वैक्सीनेशन के दौरान चला पता

वार्ड 93 पार्षद दिव्या सिंह ने अभी हाल ही में सांगानेर के व्यापारियों के लिए सैटेलाइट अस्पताल में वैक्सीनेशन कैम्प का आयोजन किया था। चार दिवसीय चले इस कैैम्प में करीब 1500 व्यापारियों ने वैक्सीनेशन करवाया। इसी दौरान पार्षद दिव्या सिंह और उनके पिता संजय सिंह गुर्जर ने महसूस किया कि गर्भवतियों को सोनोग्राफी के लिए परेशान होना पड़ रहा है। पूछताछ में उन्हें पता चला कि सैटेलाइट अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन नहीं है। ऐसे में पहले से ही परेशान गर्भवती की समस्या दोगुनी हो जाती है। कोरोना काल में इधर-उधर भटकने से आने वाले नन्हें मेहमान को भी खतरा होने की संभावना भी बढ़ जाती है। ऐसे में उन्होंने सैटेलाइट अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन लगवाने का निश्चय किया। 

पीडि़तों का दर्द देख, लिया मशीन लगाने का फैसला

इस बारे में जस्ट टुडे ने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता संजय सिंह गुर्जर से बात की। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिला दूर-दूर से इलाज के लिए सैटेलाइट अस्पताल आती हैं। फिर लाइन में लगकर पर्ची बनवाना, डॉक्टर को दिखाना और फिर दवा लेने में भी काफी समय लग जाता है। ऐसे में सोनोग्राफी जांच के लिए उन्हें प्राइवेट लैब के भी चक्कर लगाने पड़ते हैं। वैैक्सीनेशन के दौरान मुझे यह सब पता चला। अब सैटेलाइट अस्पताल में जल्द ही सोनोग्राफी मशीन लगवाई जाएगी। इसके लिए विभिन्न सोनोग्राफी मशीन बनाने वाली कम्पनियों से कीमत ली गई है। कोरोना का असर कम होते ही सोनोग्राफी मशीन खरीदी जाएगी और सैटेलाइट अस्पताल में लगवाई जाएगी। 

निजी लैब संचालकों की मनमानी पर लगेगा अंकुश

आस-पास के क्षेत्रों में सांगानेर सैटेलाइट अस्पताल सबसे बड़ा और सुविधायुक्त है। ऐसे में यहां पर मरीजों का बहुत भार रहता है। जानकारी के मुताबिक यहां पर एक माह में करीब 150 गर्भवतियों की डिलीवरी होती है। ऐसे में यहां पर सोनोग्राफी मशीन की बहुत दरकार है। सोनोग्राफी मशीन नहीं होने से मजबूरन गर्भवतियों को प्राइवेट लैब में जांच करानी पड़ती है। वहां पर लैब संचालक मनमाने दाम वसूलते हैं। अस्पताल के आस-पास लैब संचालकों के दलाल भी घूमते हैं, जो सस्ती सोनोग्राफी कराने की बात कहकर गर्भवतियों के साथ छलावा करते हैं। लैब संचालक इन्हें प्रति गर्भवती के हिसाब से मोटा कमीशन भी देते हैं। जानकारों का कहना है कि लैब संचालक सोनोग्राफी के 700 से 1200 रुपए तक लेते हैं। ऐसे में सैटेलाइट अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन लगने से लैब संचालकों की मनमानी पर रोक लगेगी और गरीब गर्भवतियों पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। 

50 सोनोग्राफी रोजाना होती हैं

सांगानेर सैटेलाइट अस्पताल में रोजाना करीब 50 सोनोग्राफी जांच गर्भवती महिला सहित दूसरे मरीजों को लिखी जाती है। चूंकि, अस्पताल में मशीन नहीं होने से ये सभी लोग प्राइवेट लैब पर जांच कराते हैं। सोनोग्राफी मशीन लगने से सोनोग्राफी की जांच अस्पताल में ही हो जाएगी। गर्भवतियों को इससे बहुत फायदा होगा।
- डॉ. देश दीपक अरोड़ा, प्रभारी सैटेलाइट अस्पताल, सांगानेर

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