सांगानेर विधानसभा में नालों पर अतिक्रमण बना नासूर...अब तो जागो निगम हुजूर

- मानसरोवर जोन और सांगानेर मेंं अतिक्रमण से सिकुड़े नाले...बारिश में बनते हैं मुसीबत का सबब, युवा एकता मंच के अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को लिखा शिकायती पत्र

- नगर-निगम ने मानसरोवर जोन और सांगानेर जोन में नालों की सफाई और मरम्मत के नाम पर बनाया करीब एक करोड़ रुपए का प्रस्ताव...दोनों ही जगह अतिक्रमण की भेंट चढ़े नाले...फिर बजट कैसे खर्च होगा?

जस्ट टुडे
जयपुर।
अभी हाल ही में नगर-निगम ग्रेटर कार्यालय की तरफ से सांगानेर विधानसभा में नालों की सफाई और मरम्मत पर खर्च का प्रस्ताव बनाया था। सरकार की ओर से बजट स्वीकृत होते ही विधानसभा के सम्बंधित जोन में नालों की सफाई और मरम्मत का कार्य शुरू हो जाएगा। हर साल नगर-निगम की ओर से नालों की सफाई और मरम्मत के नाम पर राशि जारी की जाती है। लेकिन, फिर भी नालों में कचरा भरा होता है और क्षतिग्रस्त रहते हैं। नालों के नाम पर कितना पैसा पानी में बहा, बारिश होते ही यह पोल भी खुल जाती है। सांगानेर हो या फिर मानसरोवर बारिश होते ही सड़कें दरिया बन जाती हैं। नालों की सफाई नहीं होने से कचरा बारिश के पानी के साथ सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे राहगीरों को तो परेशानी होती ही है, साथ ही मच्छर-मक्खी भी पैदा होकर बीमारियों को आमंत्रित करते हैं। इन सभी जनहित की समस्याओं को सांगानेर के युवा व्यापारी और युवा एकता मंच के अध्यक्ष जयप्रकाश बुलचंदानी ने उठाया है। उन्होंने मानसरोवर में नालों पर अतिक्रमण और गंदगी को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सहित सभी जिम्मेदारों को शिकायती पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने बिना भेदभाव के नालों को अतिक्रमण मुक्त करने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई करने का आग्रह किया है। बुलचंदानी ने जस्ट टुडे को भी शिकायती पत्र दिया। इसके बाद जस्ट टुडे ने सांगानेर विधानसभा के सांगानेर जोन और मानसरोवर जोन का दौरा किया। जस्ट टुडे ने जो जमीनी हकीकत देखी वह सुधि पाठकों के लिए ज्यों का त्यों?

मानसरोवर में नाले के सिर्फ अवशेष मौजूद

ये सभी फोटो मानसरोवर की हैं। इनमें साफ दिख रहा है कि नाला कैसे अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुका है। कई लोगों ने तो नाले को बंद कर बेसमेंट में दुकानें ही बना ली हैं। कई जगह नाले को ही पाटकर मकान बनाया जा रहा है। मानसरोवर में जहां-जहां नालों के अवशेष बचे हैं, वे स्वयं को जीवनदान मिलने की बाट जोह रहे हैं।


जस्ट टुडे ने मानसरोवर जोन में सम्पूर्ण मध्यम मार्ग, थड़ी मार्केट, शिप्रापथ रोड, विजय पथ सहित करीब-करीब सम्पूर्ण मानसरोवर क्षेत्र का दौरा किया। यहां पर मध्यम मार्ग में लोगों ने नालों के ऊपर थड़ी, दुकान और मकान बनाकर उस पर अतिक्रमण कर रखा है। मध्यम मार्ग पर तो कई जगह नाले की जगह बेसमेंट खोदकर दुकान ही बना रखी है। यहां पर भी नाले के सिर्फ अवशेष ही बचे हुए हैं। मध्यम मार्ग अतिव्यस्त मार्ग है, यह बीटू बायपास, न्यूसांगानेर रोड और सांगानेर सहित कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए लिंक रोड है। ऐसे में दिनभर यहां से हजारों लोग आवागमन करते हैं। बारिश के दिनों में पानी मध्यममार्ग पर भर जाता है और राहगीरों के लिए मुश्किल बन जाता है। सड़क पर पानी भरने से जाम के हालात बनते हैं और वाहन चालक हादसे का शिकार भी हो जाते हैं। स्थानीय निवासियों ने बताया कि नगर-निगम और स्थानीय पार्षद की उदासीनता के चलते नाले धीरे-धीरे अतिक्रमण की भेंट चढ़ चुके हैं। हर बार बारिश में गंदगी के कारण पानी ओवरफ्लो हो जाता है तथा सड़क पर पानी फैल जाता है। नालों के अंदर जमा पानी बदबू मारने लगता है, जिसमें मच्छर-मक्खी पैदा होकर गंभीर बीमारियों का सबब बनते हैं। कोरोना महामारी में गंदगी लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। 

सांगानेर में अतिक्रमण की भेंट चढ़ा नाला

फिर जस्ट टुडे ने सांगानेर में सिटी बस स्टैण्ड से संगम चौराहा, सुनारों की गली, खटीकों की ढाल, रैगरों की मोरियों से भौमिया जी का चबूतरा, मालपुरा गेट से अनाज मंडी-रामनगर कॉलोनी, टिक्की वालों का मोहल्ला, बगरैटों का चौक, सिटी बस स्टैण्ड से मुख्य बाजार, चमन कॉलोनी और दादूनगर स्थित नालों का दौरा किया। इसमें सामने आया कि ज्यादातर जगहों पर नालों के ऊपर पक्का निर्माण हो रखा है। सांगानेर बस स्टैण्ड से लेकर मुख्य बाजार, सुनारों की गली, भौमियाजी का चबूतरा, हलवाईयों की गली से मालपुरा गेट और अनाज मण्डी रोड तक सभी जगह दुकान मालिकों ने नाले के ऊपर पक्का निर्माण कराकर दुकान की सीमा को बढ़ा लिया है। कई जगहों पर तो दुकान मालिकों ने दुकान के ऊपर  भी पक्का निर्माण करा अतिक्रमण कर लिया है। ऐसे में सांगानेर जोन में नाला कहीं दिखाई नहीं देता है। कुछेक स्थानों पर सिर्फ नाले के अवशेष दिखते हैं, जो स्वयं को पुर्नजीवित करने की बाट जोह रहा है। नाले पर अतिक्रमण होने से बारिश के दिनों में सांगानेर की सड़कें दरिया बन जाती है। बाइक सवारों को पानी से बाइक निकालने में मशक्कत का सामना करना पड़ता है। सड़क पर पानी भरने कई घंटों जाम लगता है और लोग हादसे का शिकार हो जाते हैं। 

पहले अतिक्रमण हटे फिर हो मरम्मत

नगर-निगम और स्थानीय पार्षद को चाहिए कि पहले वे अतिक्रमण को ध्वस्त कर उसे जीवनदान दें। फिर नाले की सफाई और मरम्मत करें, जिससे मानसरोवर और सांगानेर के गंदे पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था हो सके। बिना अतिक्रमण हटाए, नालों की सफाई करना तो महज खानापूर्ति होकर रह जाएगी। 

नालों को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए इनसे लगाई गुहार 

युवा एकता मंच के अध्यक्ष जयप्रकाश बुलचंदानी ने बताया कि उन्होंने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, जयपुर सांसद रामचरण बोहरा, सांगानेर विधायक अशोक लाहोटी, सांगानेर में कांग्रेस नेता पुष्पेन्द्र भारद्वाज, सम्बंधित वार्डों के पार्षद, ग्रेटर नगर-निगम महापौर, सतर्कता आयुक्त, उपायुक्त को लिखित शिकायत की है। इन सभी से आग्रह किया है कि जल्द से जल्द नालों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। साथ ही अतिक्रमियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। 

मानसरोवर जोन और सांगानेर जोन में यहां-यहां होनी है नालों की सफाई और मरम्मत

मानसरोवर जोन के वार्ड 65, 66, 67, 69, 70, 72, 73, 75, 76, 77, 78, 79, 80, 81, 82, 83, 85 में कुल 58 नालों की सफाई और मरम्मत के लिए नगर-निगम ने प्रस्ताव बनाया है। इन पर करीब 40.13 लाख रुपए की राशि खर्च होगी। 
वहीं सांगानेर के वार्ड 84, 86, 87, 88, 89, 90, 92, 93, 94, 95, 96, 97, 98, 99, 100, 101, 102, 103 में कुल 99 नालों की सफाई और मरम्मत होनी है। इस पर करीब 59.46 लाख रुपए खर्च होंगे। 


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