सांगानेर का बाजार छोटा...एक ही हो व्यापार महासंघ, सभी व्यापारी बनें मांझी तो मैं फिर अध्यक्ष बनने को राजी

- सांगानेर व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष से जस्ट टुडे की खास बातचीत


- पद पाने के लिए 5-7 लोगों ने बनाया दूसरा व्यापार महासंघ 

- पदों की बंदरबांट कर, दूसरे व्यापार महासंघ ने बाजार का कर दिया बंटाधार

- अध्यक्ष कोई भी बने, सभी व्यापारियों की हो सर्वसम्मति

राधेश्याम डंगायच, पूर्व अध्यक्ष सांगानेर व्यापार महासंघ

जस्ट टुडे
जयपुर।
सांगा बाबा की नगरी से नाम से विख्यात सांगानेर वर्तमान में भी स्वयं को उपेक्षित महसूस कर रहा है। राजनीतिक रूप से सम्पन्न होने के बाद भी यहां के निवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए मोहताज हैं। यही हाल सांगानेर की हृदय स्थली मुख्य बाजार का भी है। कहने को तो सांगानेर में दो व्यापार महासंघ हैं। लेकिन, व्यापारियों और ग्राहकों के हित के लिए किसी भी व्यापार महासंघ ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाए हैं। दो व्यापार महासंघ बनने के बाद बाजार का विकास अवरूद्ध ही हुआ है। क्योंकि, जब कोई भी व्यापार महासंघ काम करवाने की सोचता है तो दूसरा व्यापार महासंघ उसकी 'टांग खिंचाई' करता है। साथ ही दो व्यापार महासंघ बनने के बाद इनमें राजनीतिक पार्टियों का भी दखल शुरू हो गया है। ऐसे में सांगानेर बाजार का विकास रुका हुआ है। इसका फायदा उठाकर कई व्यापारियों ने सड़क तक अतिक्रमण कर अवैध दुकान लगा रखी है। कई व्यापारी तो मौका-परस्त हैं। जब कोई व्यापार महासंघ उनके अतिक्रमण को हटाने की शुरुआत करता है तो वे दूसरे व्यापार महासंघ को साथ ले आते हैं। ऐसे में अतिक्रमण की वजह से सांगानेर बाजार का दम घुट रहा है। इन सभी समस्याओं से आजिज व्यापारी भी अब सांगानेर बाजार में एक ही व्यापार महासंघ चाहते हैं। दोनों व्यापार महासंघों के पदाधिकारी भी यही चाहते हैं कि दोनों मिलकर एक ही व्यापार महासंघ बने। जस्ट टुडे ने भी व्यापारियों की इन्हीं भावनाओं का खयाल करते हुए इस समस्या की टोह ली। जस्ट टुडे ने व्यापारियों से भी इस बारे में बात की तो सभी का कहना था कि व्यापार महासंघ एक ही होना चाहिए। जस्ट टुडे ने इस सन्दर्भ में सांगानेर व्यापार महासंघ के पूर्व अध्यक्ष राधेश्याम डंगायच से बात की। जस्ट टुडे ने उनसे जाना कि पहले जब एक व्यापार महासंघ था तो क्या फायदे थे और क्या नुकसान? वहीं जब दो व्यापार महासंघ बने तो व्यापारियों का ज्यादा फायदा हुआ या फिर नुकसान? जस्ट टुडे के सुधि पाठकों के लिए पूरा साक्षात्कार पूर्व अध्यक्ष की जुबानी। 

- सांगानेर में पहले एक ही व्यापार महासंघ था, सांगानेर व्यापार महासंघ नाम से...ऐसी क्या आवश्यकता हुई कि दूसरे व्यापार महासंघ का गठन करना पड़ा?

मेरे समय में एक ही व्यापार महासंघ था। फिर कुछ 5-7 लोगों ने मिलकर एक बैठक का आयोजन किया। उसमें मुझे भी बुलाया गया। मुझसे कहा गया कि व्यापार महासंघ में अब चुनाव कराएंगे। मैंने इस मांग को सहर्ष स्वीकार कर लिया। चुनाव की तारीख मुझसे घोषित करवा ली। इसके बाद इन लोगों ने आपस में मिलकर पदों की बंदरबांट कर ली। एक अध्यक्ष बन गया और एक मंत्री बन गया, खुद ही माला पहन ली। चुनाव होने ही नहीं दिए गए। फिर हमने कहा कि चुनाव कराएंगे। इस पर इन लोगों ने मिलकर नए व्यापार महासंघ का गठन कर लिया। जिसे व्यापार महासंघ, सांगानेर नाम दिया गया। जिस व्यापार महासंघ से हम जुड़े हुए है, उसका नाम सांगानेर व्यापार महासंघ है। उस समय मैं सांगानेर व्यापार महासंघ का अध्यक्ष था। उसके बाद हमने जो चुनाव की तारीखें घोषित की। उसी दिन चुनाव कराए और अध्यक्ष सहित पदाधिकारी बनाए। इन लोगों ने कोई चुनाव नहीं कराए और 5-7 लोगों ने मिलकर नया व्यापार महासंघ बना लिया। तभी से सांगानेर में दो व्यापार महासंघ हो गए। 

- सांगानेर को देखते हुए क्या इसमें दो व्यापार महासंघ होने चाहिए? 

सांगानेर में दो व्यापार महासंघ नहीं होने चाहिए। क्योंकि, सांगानेर का बाजार छोटा है। इसमें एक ही व्यापार महासंघ होना चाहिए। दो व्यापार महासंघ होने से इस बाजार का कभी विकास नहीं हो सकता है। वास्तविकता में यदि इस बाजार का विकास करना है तो यहां एक ही व्यापार महासंघ बने। सभी व्यापारी मिल-जुलकर रहें और एक ही व्यापार महासंघ के बैनर तले रहें तो ही इस बाजार का विकास संभव है। 

- दो व्यापार महासंघ होने से व्यापारी और बाजार का फायदा हुआ है या फिर नुकसान?

अलग-अलग व्यापार महासंघ होने से व्यापारी और बाजार दोनों का ही नुकसान हुआ है। दो व्यापार महासंघ होने से गुटबाजी बढ़ी है। गुटबाजी से कभी भी बाजार का विकास नहीं हो सकता है। दो व्यापार महासंघ होने से इनमें राजनीतिक पार्टियों का भी दखल बढ़ा है। जबकि व्यापार महासंघों में किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। व्यापारियों के लिए तो सभी पार्टियां समान होनी चाहिए। व्यापार महासंघों को तो व्यापारियों और बाजार के हित की पैरवी करनी चाहिए। व्यापार बढ़ाने की योजना पर काम करना आना चाहिए।
       दूसरे व्यापार महासंघ ने व्यापारियों और बाजार के हित की कभी नहीं सोची। व्यापार कैसे बढ़े, इसकी कोई योजना नहीं बनाई। इन लोगों ने सिर्फ पद के लिए और राजनीतिक ख्याति प्राप्त करने पर ही काम किया। इसलिए ही दूसरे व्यापार महासंघ का इन लोगों ने गठन किया। जबकि कोई भी व्यापार महासंघ हो, वह सिर्फ व्यापारियों के फायदे की ही बात करता है। मेरी समझ में यह नहीं आता कि ये लोग चुनाव कराना क्यों नहीं चाहते? जबकि हर जगह यही होता है कि सर्वसम्मति से जो व्यापारी चाहता है, वही अध्यक्ष बने, वही मंत्री और कैशियर बने? यह नहीं होता है कि मैं ही स्वयं माला पहनकर पदाधिकारी बन जाऊं? जब पहले एक व्यापार महासंघ था और उसमें चुनाव कराने की बात पर सहमति हो गई थी तो फिर इन लोगों ने दूसरा व्यापार महासंघ क्यों बनाया? इस बात को मैं आज तक नहीं समझ सका? इससे साफ पता चलता है कि इन लोगों को सिर्फ अपनी सीट से मतलब है। व्यापारियों के फायदे से इन्हें कोई मतलब नहीं है। यदि ये सीट चाहते हैं तो चुनाव कराओ। व्यापारी जिसे चाहेगा, उसे सीट दे देगा? 

- जब दो व्यापार महासंघ बनने से बाजार और व्यापारियों का नुकसान ही हुआ है तो फिर दूसरा व्यापार महासंघ क्यों बनाना पड़ा? 

5-7 लोग व्यापार महासंघ में पद चाहते थे। हमने कहा कि पद चाहते हो तो चुनाव कराओ। चुनाव में जिसे व्यापारी चुनेंगे, पद उसी को दिया जाएगा। इन लोगों ने चुनाव कभी कराए नहीं। आपस में मिलकर पद बांट लिए। एक अध्यक्ष बन गया, एक मंत्री बन गया, एक कैशियर बन गया और दूसरों को अन्य पद बांट दिए। इन लोगों ने सिर्फ पद पाने के लिए चुनाव नहीं कराए। जबकि नियम यह कहता है कि सभी व्यापारियों को एक जगह बुलाया जाए और एक व्यापार महासंघ बनाया जाए। लेकिन, इन लोगों ने पद पाने के लिए दो व्यापार महासंघ बना दिए। 

- वर्तमान में सांगानेर में दो व्यापार महासंघ हैं? मान लिया जाए कि व्यापारी अब एक ही व्यापार महासंघ चाहते हैं तो किस प्रकार का महासंघ होना चाहिए? अध्यक्ष किस प्रकार का होना चाहिए? 

जिस प्रकार से व्यापारी चाहें, वैसा ही व्यापार महासंघ होना चाहिए? व्यापारी सर्वसम्मति से जिसे चाहे अध्यक्ष बनाए। नियम भी यही कहता है कि सर्वसम्मति से ही अध्यक्ष बनना चाहिए? यदि अध्यक्ष पद पर दो नाम आते हैं तो फिर चुनाव होना चाहिए? यदि अध्यक्ष पद पर एक ही दावेदार है तो फिर सर्वसम्मति से उसे बनाया जाए? चूंकि, सांगानेर बाजार छोटा है, इसलिए यहां पर सर्वसम्मति से एक ही अध्यक्ष बने? ऐसा होने से गुटबाजी नहीं होगी, बाजार का विकास भी होगा? अध्यक्ष भी वही होना चाहिए, जो बाजार और व्यापारियों का विकास कर सके। व्यापार महासंघ का मतलब ही यही होता है कि जो व्यापार बढ़ाने पर काम करे। क्योंकि, जब व्यापार ही नहीं बढ़ेगा तो फिर व्यापारी क्या करेगा? 

- यदि सांगानेर बाजार के व्यापारी सर्वसम्मति से आपको फिर से व्यापार महासंघ का अध्यक्ष बनाना चाहें तो क्या आप इसके लिए तैयार हैं? क्या आप इस पद को संभालने के लिए स्वयं को उपयुक्त मानते हैं? 

इस मामले में मैं कुछ भी नहीं सकता। व्यापारी जो चाहेंगे, वही होगा। सभी व्यापारी जिसे सर्वसम्मति से अध्यक्ष बना देंगे, वही सर्वमान्य अध्यक्ष बनेगा। मैं तो हमेशा से ही व्यापारियों के साथ हूं। सभी व्यापारी जो तय करेंगे, वही मुझे भी मंजूर होगा। मनमर्जी से कोई कुछ नहीं बन सकता है। जबकि यहां पर तो मनमर्जी चलती है, दादागिरी चलती है। जबकि नियम यह कहता है कि सर्वसम्मति से जो व्यापारी चाहे, वह अध्यक्ष होगा। यदि सांगानेर के व्यापारी सर्वसम्मति से मुझे फिर से अध्यक्ष बनाना चाहें तो मैं इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए बखूबी तैयार हूं। 

- सांगानेर व्यापार महासंघ में बतौर अध्यक्ष आपका कार्यकाल करीब 15-16 साल का रहा है? बतौर अध्यक्ष आपके कार्यकाल की कुछ अहम उपलब्ध्यिां बताएं? 

मेरे कार्यकाल के बारे में आप स्वयं बाजार में व्यापारियों से पूछो। वो स्वयं आपको मेरे कार्यकाल के बारे में बता देंगे। पहले हलवाई गली 13 फीट की थी। हमने व्यापारियों के सहयोग से इसे चौड़ा करवाया। इसमें सरकार का किसी भी प्रकार का कोई सहयोग नहीं लिया। इस गली को चौड़ा करने के लिए व्यापारियों ने अपनी पुरखों की दुकानों को आपसी समझाइश से तोड़ा। पहले बाजार में चौथवसूली होती थी, उसे हमने व्यापारियों के सहयोग से बंद कराया। इस कार्य में उस समय पुलिस-प्रशासन का भी भरपूर सहयोग मिला। चौथवसूली करने वालों ने मुझे व्यक्तिगत धमकी भी दी, लेकिन, मैं उनसे नहीं डरा। क्योंकि, सभी व्यापारी मेरे साथ थे। आखिर में व्यापारियों के सहयोग से चौथवसूली बंद कराई। बाजार में चार जगह सार्वजनिक मूत्रालय बनाए। इनमें नगर-निगम रोड के कोने पर, डॉक्टर इन्द्रलाल संतलानी के सामने, एक तहसील के सामने और एक बस स्टैण्ड पर बनवाया था। इसके अलावा हमने बाजार में पेयजल के लिए दो-तीन बोरिंग करवाए थे। इसके अलावा ग्राहकों और व्यापारियों की सुविधा के लिए कई कार्य किए थे। 

- यदि आपको फिर से सांगानेर बाजार का अध्यक्ष बनने का मौका मिले तो आप बाजार में क्या-क्या सुधार करवाना चाहेंगे? 

सबसे पहले मैं व्यापारियों के फायदे की योजना बनाऊंगा? उनके व्यापार को बढ़ाने पर फोकस करूंगा। व्यापारियों और ग्राहकों को ज्यादा से ज्यादा सहूलियत मिले और व्यापार बढ़े, इस पर कार्य करूंगा। क्योंकि, व्यापार बढ़ेगा तो व्यापारी की भी उन्नति होगी। व्यापार महासंघ का अध्यक्ष बनने का एक ही मतलब है कि व्यापार बढ़े, व्यापारियों का ज्यादा से ज्यादा फायदा हो। जब ग्राहक को भी सहूलियत मिलेगी तो स्वत: ही व्यापार बढ़ जाएगा। आपसी समझाइश से बिना भेदभाव के सभी व्यापारियों का अतिक्रमण हटाया जाएगा। 

- यदि सांगानेर में दो व्यापार महासंघों को मिलाकर एक नया महासंघ बनाया जाए? तो आप क्या मानते हैं कि कितने फीसदी व्यापारी आपको अध्यक्ष पद पर फिर से चाहेंगे? आप दूसरों के मुकाबले स्वयं को इस मामले में कितना आगे मानते हैं? 

इस मामले में स्वयं कुछ नहीं कह सकता हूं। इस बारे में आप स्वयं ही व्यापारियों से पूछो। यदि व्यापारी मुझे फिर से अध्यक्ष चाहें तो मैं तैयार हूं। 

- आपने कहा कि दूसरा व्यापार महासंघ, जिसका नाम व्यापार महासंघ, सांगानेर है, उसमें जो पदाधिकारी बने हुए हैं, वे बिना चुनाव के बने हैं। ऐसे में माना जाए कि वह व्यापार महासंघ अवैध है?

नियमानुसार तो वह अवैध व्यापार महासंघ है। जिस व्यापार महासंघ के बिना चुनाव ही पदाधिकारी बना दिए गए, वह तो अवैध ही कहलाएगा। ऐसे तो कोई भी मनमर्जी से पदाधिकारी बन सकता है। नियमानुसार किसी भी व्यापार महासंघ में पदाधिकारी कम से कम होने चाहिए? जबकि इस व्यापार महासंघ में मनमर्जी से लोगों को जोड़े रखने के लिए पदों की बंदरबांट की हुई है। 5-7 जनों को उपाध्यक्ष बना रखा है। जबकि नियमानुसार एक या अधिकतम दो ही उपाध्यक्ष होने चाहिए? इस व्यापार महासंघ में कई पद तो ऐसे हैं, जो नियमानुसार होते ही नहीं हैं, लेकिन, व्यापार महासंघ चलाने के लिए लोगों को पदों का लालच दे रखा है। 

- अभी सांगानेर में दो व्यापार महासंघ हैं। एक को कांग्रेस समर्थित माना जाता है तो दूसरे को भाजपा समर्थित? आपके हिसाब से किसी भी व्यापार महासंघ पर किसी भी राजनीतिक दल की इस तरह की मुहर लगना सही है या फिर गलत? 

किसी भी व्यापार महासंघ पर इस तरह की मुहर लगना गलत है। किसी भी व्यापार महासंघ को किसी भी राजनीतिक दल से कोई सरोकार नहीं होना चाहिए। उसे तो सिर्फ अपने व्यापार और व्यापारियों से ही मतलब होना चाहिए। बाजार में कैसे उन्नति हो और व्यापार को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर ही व्यापार महासंघों का फोकस होना चाहिए। 

- आपने कहा कि दूसरे व्यापार महासंघ वाले कभी ट्रैफिक पुलिस को बुलवाकर ग्राहकों के वाहन उठवाते हैं तो कभी पुलिस बुलाकर व्यापारियों के चालान करवाते हैं? इससे उन्हें क्या फायदा होता है?

ये लोग सिर्फ अपना नाम चमकाने के लिए ऐसा करते हैं। इन्होंने सिर्फ अपना नाम ऊंचा करने पर ही हमेशा ध्यान दिया है। मुझे यह समझ में नहीं आता कि जब बाजार से ग्राहक की बाइक ट्रैफिक पुलिस वाला उठा लेगा तो फिर ग्राहक यहां क्यों आएगा? ग्राहक नहीं आने से व्यापारियों का नुकसान होगा। पहले सांगानेर में जो व्यापार होता था, वर्तमान में वह घटकर 25 फीसदी ही रह गया है। इन लोगों ने सिर्फ अपना फायदा देखा है, हमेशा व्यापारियों का नुकसान ही कराया है। आप बाजार में किसी भी व्यापारी से पूछ लीजिए कि पहले के मुकाबले व्यापार कितना घट गया है। इसके बजाय बाहर खुल रहीं दुकानों पर धंधे चमकने लग गए हैं। 

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