रीढ़, शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग !

वर्ल्ड स्पाइन डे स्पेशल



जस्ट टुडे
जयपुर। अगर हम इसे यूं कहें कि ईश्वर ने अपनी कल्पना को सबसे अच्छा साकार रूप मानव शरीर के रूप में दिया है तो यह गलत नहीं होगा।  और मानव सुंदर और आकर्षक हो इसके लिए ईश्वर ने उसके शरीर में रीढ़ की हड्डी लगाई है यानी रीढ़ ना सिर्फ शरीर को एक साकार रूप देती है साथ ही पूरे शरीर को एक मजबूत सपोर्ट भी प्रदान करती है। 
कहते हैं किसी भी चीज की स्टेबिलिटी के लिए उसका बेस मजबूत होना चाहिए और हमने अक्सर यह कहावत भी सुनी है की रीढ़ की हड्डी अगर मजबूत होगी तो सब ठीक रहेगा। यानी स्टेबिलिटी रहेगी अर्थात रीढ़ की हड्डी हमारे जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि अगर रीढ़ ना हो तो कुछ भी सीधा और सरल नहीं हो सकता। इसलिए हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखना बहुत जरूरी है।


100 करोड़ लोगों को रीढ़ की हड्डी से जुड़ी बीमारियां:



मानव शरीर के हर अंग की अपनी विशेषता होती है। लेकिन रीढ़ की हड्डी एक ऐसा अंग है जो पूरे मानव शरीर को कंट्रोल करता है और इसके बिगड़ने पर कोई भी अंग कभी भी प्रभावित हो सकता है । आज के संदर्भ में अगर हम बात करें तो आज सबसे ज्यादा बोझ रीढ़ की हड्डी पर ही होता है। बचपन में भारी-भरकम स्कूल बैग के बोझ से लेकर जीवन की गाड़ी के पहिए का बोझ और तनाव रीढ़ की हड्डी को टेढ़ा कर रहा है। एक आकलन के अनुसार दुनिया भर में आज करीब ५ फ़ीसदी आबादी यानी करीब 100 करोड़ लोग रीढ़ की हड्डी के दर्द और इससे जुड़ी बीमारियों से ग्रसित हैं।
सवाई मानसिंह अस्पताल से स्पाइन विशेषज्ञ के तौर पर सेवानिवृत्त डॉ सुरेंद्र आबूसरिया के अनुसार कोरोना महामारी ने दुनिया भर के लोगों में रीढ़ की हड्डी की बीमारियों को अप्रत्याशित तौर पर बढ़ा दिया है। डॉक्टर आबूसरिया कहते हैं कि धरती पर विकलांगता का सबसे बड़ा अकेला कारण रीढ़ की हड्डी से सम्बन्धित है। उनके अनुसार कोरोना काल की दिनचर्या ने आम आदमी के जीवन को बदल कर रख दिया है और इसी बदली हुई दिनचर्या जिसमें "वर्क एट होम" में घर में एक ही जगह रह कर काम करना, ज्यादातर कंप्यूटर और मोबाइल पर काम साथ ही शारीरिक कसरत और मॉर्निंग वॉक के बंद होने से रीड की हड्डी से संबंधित बीमारियां जबरदस्त तरीके से बढ़ी हैं।


रीढ़ की हड्डी से ग्रसित और रोगों के कारण: 

डॉक्टर्स के अनुसार लंबे समय तक एक स्थान पर बैठना, बैठते वक्त गलत तरीके से शरीर को मोड़ना या झुका कर बैठना, गर्दन झुका कर घंटों मोबाइल पर काम करना, सोते समय गलत पोजीशन में सोना, सामान्य से अधिक शरीर का वजन बढ़ना, किडनी की समस्या, लगातार स्मोकिंग, कैल्शियम की शरीर में लगातार कमी और खाने-पीने के साथ-साथ रोजमर्रा की व्यायाम- योगा और ऐसी छोटी-छोटी आदतों को नजरअंदाज करने के कारण हम रीढ़ की हड्डी और उसे संबंधित अनेकों रोगों से ग्रसित हो रहे हैं।


कौन-कौन से रोग हैं आम: 


रीढ़ से होने वाले रोगों में रीढ़ की हड्डी में दर्द से शुरुआत होती है। जिसमें गर्दन में दर्द, सर्वाइकल स्पाइन, स्लिप डिस्क, सौर बैक, रूमेटिका गठिया, स्पाइनल टीबी, स्पाइनल ट्यूमर और स्पाइन कैंसर जैसे रोग आज आम बात हो गई है। इनमें से शुरुआती तो कुछ ऐसे लोग हैं जो आमतौर पर आज की दिनचर्या के अनुसार १०० में से ६० फ़ीसदी लोगों को हो जाते हैं इनमें सर्वाइकल और स्लिप डिस्क बहुत आयात में लोगों को अपनी चपेट में लिए हुए हैं।


ऐसे कर सकते हैं बचाव: 

रीढ़ की हड्डी से संबंधित रोगों को काफी हद तक रोका जा सकता है जिसके लिए सबसे पहले हमें अपने खाने-पीने की आदतों को बदलना होगा। उसके बाद जीवनशैली में बदलाव और रोज हल्का व्यायाम, दफ्तर में लॉन्ग सिटिंग से बचना और योगा जैसी चीजें हमें रीढ़ की हड्डी से संबंधित बीमारियों से दूर रहने में मदद कर सकती हैं। डॉक्टर्स और विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज योग में भुजंगासन बालासन ताड़ासन और मकरासन काफी फायदेमंद है। वहीं ऑफिस में काम करते वक्त कमर सीधी रखकर बैठना, पैरों को जमीन पर रखना, पैरों को क्रॉस करके ना बैठना, कंप्यूटर की स्क्रीन को सीधे रखना, पूरा वजन बैठते समय कुर्सी के पिछले हिस्से पर रखना और लंबी ड्राइविंग के वक्त पीठ को सहारा देने के लिए तकिए का उपयोग करना ऐसी आदतें हैं जो हमें रीढ़ की हड्डी से संबंधित बीमारियों से बचा सकती हैं।
बहरहाल "अंत भला तो सब भला" वाली कहावत भी यहां कहना सार्थक है क्योंकि अगर शरीर को स्वस्थ रखकर अच्छा और क्वालिटी टाइम अगर आप परिवार को देते हैं तो इससे अच्छी और बेहतर बात आपके जीवन में और क्या हो सकती है। इसलिए दैनिक व्यायाम और खानपान तथा सुनियोजित जीवन शैली आप को स्वस्थ रखने में हमेशा मदद करेगी और यही आपके जीवन की रीढ़ की हड्डी है।


 


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