एक्सक्लूसिव: ...तो 'सूरत' को पछाड़ सांगानेर बनेगा देश की सूरत

जस्ट टुडे की स्पेशल रिपोर्ट


 


- पीएम मोदी के लोकल...वोकल...बल और ग्लोबल के आह्वान पर सांगानेर प्रिंट ट्रेडर्स एसोसिएशन ने शुरू की कवायद


- रीको से मांगी 500 बीघा जमीन...मिले सकारात्मक संकेत...डीपीआर बनाने के निर्देश


- सांगानेर की पहचान और होगी दमदार...रोजगार के भी खुलेंगे द्वार



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जस्ट टुडे

जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकल...वोकल...बल और ग्लोबल के आह्वान पर अब सभी लोगों ने इसी दिशा में कवायद शुरू कर दी है। बिजनेस मैन हो या फिर ग्राहक, अब सभी की मंशा 'देशी माल' को ही वरीयता देने की है। ऐसे में सांगानेर प्रिंट ट्रेडर्स एसोसिएशन ने भी इस दिशा में कदम बढ़ा लिए हैं। सांगानेर में करीब 1000 प्रिंट ट्रेडर्स हैं। अब इन सभी को एक ही छत के नीचे लाने का कार्य किया जा रहा है, जिससे यह टेक्सटाइल्स इण्डस्ट्री बन सके। सांगानेर में टेक्सटाइल्स इण्डस्ट्री बनाने का बीड़ा उठाया है प्रवीण शाह और घनश्याम कूलवाल ने। इस सम्बंध में लॉकडाउन से पहले प्रवीण शाह ने रीको एमडी से भी मुलाकात की थी। उन्होंने सकारात्मक संकेत देते हुए इसकी विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) बनाने को कहा है। एसोसिएशन की ओर से डीपीआर बनाने की दिशा में कवायद भी शुरू कर दी गई है। यदि ऐसा होता है तो फिर सूरत को पछाड़कर सांगानेर देश की नम्बर वन टेक्सटाइल इण्डस्ट्री बन सकता है।

एसोसिएशन से जोडऩे की शुरू हुई कवायद 


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इस दिशा में सकारात्मक पहल करते हुए सांगानेर के सभी 1000 प्रिंट ट्रेडर्स को अब प्रिंट ट्रेडर्स एसोसिएशन से जोडऩे की कवायद शुरू कर दी गई है। इसके लिए प्रवीण शाह को कार्यकारी अध्यक्ष और घनश्याम कूलवाल को संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है। इनका लक्ष्य एक जून से पहले 500 प्रिंट ट्रेडर्स को एसोसिएशन में सदस्य बनाने का है। 14 मई से शुरू किए गए सदस्यता अभियान में अभी तक 200 सदस्य बना लिए गए हैं।
 
सभी को किया जा रहा है संगठित 


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इन्होंने रीको से टेक्सटाइल्स इण्डस्ट्री के लिए 500 बीघा जमीन की मांग की है। जिस पर रीको की ओर से सकारात्मक संकेत दिए गए हैं। रीको ने इसकी पूरी कार्ययोजना का मसौदा तैयार करने को कहा है, जिससे वो इस पर गंभीरता पूर्वक विचार कर सके। इसके लिए ही सबसे पहले एसोसिएशन से सभी प्रिंट ट्रेडर्स को जोड़ा जा रहा है।

रीको से ऑर्गेनाइज्ड का मिलेगा डबल फायदा


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अभी सांगानेर के प्रिंट ट्रेडर्स रीको से ऑर्गेनाइज्ड नहीं है। ऐसे में उन्हें ना तो बैंक लोन मिल पाता है और ना ही एमएसएमई के तहत मिलने वाली सब्सिडी सहित कई अन्य फायदे। ऐसे में इण्डस्ट्री की कल्पना साकार होगी तो फिर ये सभी रीको से ऑर्गेनाइज्ड हो जाएंगे। फिर सभी लाभ इनको मिलेंगे, इससे इन्हें व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। जब व्यापार बढ़ेगा तो मुनाफा भी बढ़ेगा। सांगानेर में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।

चाइना मॉडल पर फोकस...लोकल बनेगा ग्लोबल


प्रिंट ट्रेडर्स एसोसिएशन के कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण शाह ने बताया कि हमारा फोकस लोकल, वोकल, बल और ग्लोबल पर है। हमारे पास लोकल...वोकल तो है, लेकिन बल यानी हम संगठित नहीं हैं। अभी जयपुर में सांगानेर, पुरोहित जी का कटला, सीकर हाउस, धूला हाउस, बापू बाजार सभी जगह इसका कार्य हो रहा है। माल को एक स्थान से दूसरी जगह पहुंचाने से लागत भी बढ़ जाती है। मेरा मानना है कि चारदीवारी से सारी मैन्युफेक्चरिंग को हटा दिया जाए और वहां सिर्फ डिस्प्ले सेंटर ही बने। चूंकि, चारदीवारी टूरिस्ट डेस्टिनेशन है, मैन्युफेक्चरिंग हटने से भीड़ कम होगी और टूरिस्ट को घूमने की ज्यादा आजादी मिलेगी। ऐसा होने से व्यापार बढ़ेगा। इसलिए हमें ग्लोबल बनने के लिए पहले सभी को संगठित होना पड़ेगा।
इस पूरी प्रक्रिया में हमारा फोकस भी 'चाइना मॉडल' की तरह है। यानी सभी चीजें एक की जगह। इसलिए सभी को एक ही छत के नीचे लाने का प्रयास किया जा रहा है, इससे लागत कम आएगी। लागत कम आने से हम अपने उत्पादों को किफायती दामों पर ग्राहकों को उपलब्ध करवा सकेंगे। उन्होंने बताया कि यदि हमें 500 बीघा भूमि रीको की ओर से मिलती है तो उसमें ट्रेडिंग, मैन्युफेक्चरिंग, लैब्स, ट्रांसपोर्ट, बैंकिंग, होटल्स, प्रदर्शनी स्थल सभी बनाए जाएंगे। जिससे टेक्सटाइल्स का सारा कार्य एक ही जगह से होगा। इसके लिए सभी को किफायती दामों पर ऑफिस और गोदाम भी उपलब्ध कराए जाएंगे। हम जल्द ही डीपीआर बनाकर रीको में इसके लिए आवेदन करेंगे।

10 गुना तक बढ़ जाएगा बिजनेस


प्रिंट ट्रेडर्स एसोसिएशन के संयोजक घनश्याम कूलवाल ने बताया कि ऐसा होने से व्यापार 10 गुना तक बढ़ जाएगा। इसका तर्क देते हुए बताया कि कोरोना महामारी के चलते देश में चाइना माल आना बंद हो गया है। लोकल...वोकल...बल और ग्लोबल के बाद कोई भी अब चाइना से माल ना तो मंगाएगा और ना ही ग्राहक खरीदेंगे। चूंकि, इस बिजनेस में चाइना माल की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी की थी। ऐसे में हमारे पास उस 40 फीसदी हिस्से को अपना बनाने का सुनहरा मौका है। क्योंकि, देशभर में सांगानेर के अलावा मेरठ, कोलकाता और अहमदाबाद में ही इसका कार्य होता है। लेकिन, सांगानेर का कपड़ा किफायती होने के साथ ही कॉटन का होता है। बाकी जगह का कपड़ा सिंथेटिक होता है। सिंथेटिक कपड़े से चर्म रोग होने की आशंका बनी रहती है। वहीं कॉटन कपड़ा आरामदायक रहता है। ऐसे में यदि हम टेक्सटाइल इण्डस्ट्री बनाने में सफल हो गए तो फिर देश के टेक्सटाइल्स उद्योग पर सांगानेर का ही नाम अव्वल होगा। 


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