सांगानेर का यह 'राजा हिन्दुस्तानी' दिल से भी 'राजा'

सांगानेर में छाछ-राबड़ी बेचकर परिवार का पालन करता है यह राजा हिन्दुस्तानी
50000 रुपए कर्ज लेकर पुलिसकर्मियों को पिला रहा चाय

जस्ट टुडे
सांगानेर। अपने लिए जिए तो क्या जिए...ऐ दिल तू जी जमाने के लिए। ये फिल्मी गाने की पंक्तियां सांगानेर के 'राजा हिन्दुस्तानी' पर बिलकुल सटीक बैठती हैं। सांगानेर का यह 'राजा हिन्दुस्तानी' जेब से भले ही 'राजा' नहीं हो, लेकिन, दिल का 'राजा' है। लॉकडाउन के इस आपातकाल में हजारों आर्थिक रूप से सम्पन्न लोग जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं, लेकिन, यह  'राजा हिन्दुस्तानी' उनसे बिलकुल अलग है। इसके पास दौलत तो नहीं है, लेकिन फिर भी अपनी हैसियत से बढ़कर इस लॉकडाउन में पुण्य का कार्य कर रहा है। इसकी दरियादिली को देखकर और उसके पीछे की कहानी को सुनकर पत्थर दिल भी एक बार जरूर पसीज जाएगा।

पूरी कहानी 'राजा' की जुबानी


मूल रूप से जोधपुर जिले के पीपाड़ शहर के पास एक छोटे से गांव के निवासी 'राजा हिन्दुस्तानी' ने बताया कि करीब 17 साल की उम्र में ही जयपुर आ गया और फिर यहीं का होकर रह गया। अपने जुगाड़ से बनाई चलती-फिरती दुकान पर वो मौसम के हिसाब से सामान बेचता है। अभी गर्मियों का सीजन शुरू हुआ था तो उस पर छाछ-राबड़ी बेच रहा था। लेकिन, अचानक लॉकडाउन ने उनकी दुकान को थाम दिया। लॉकडाउन में अपने परिवार की फिक्र ना करते हुए परोपकार का कार्य करने की सोची। लेकिन, पैसा नहीं था...परोपकार का जुनून इस कदर हावी था कि इस नेक दिल इनसान ने करीब 50000 रुपए का कर्जा ले लिया। इन कर्ज लिए पैसों से यह 'राजा हिन्दुस्तानी' रोजाना करीब 1000 पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क चाय पिला रहा है। 


चाय पी लो चाय...गर्मा गर्म चाय

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राजा हिन्दुस्तानी' ने बताया कि अपनी चलती-फिरती दुकान पर वह चाय बनाकर फिरता है और पूरे सांगानेर, प्रताप नगर, मानसरोवर, केसर चौराहा, मुहाना मण्डी आदि कई जगहों पर मिलने वाले पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क चाय पिला रहा है। इस बारे में उसने बताया कि इस कोरोना वायरस के चलते जहां सभी लोग अपनी जान बचाने में लगे हुए हैं। वहीं ये पुलिसकर्मी अपनी जान की परवाह ना करते हुए लोगों की सुरक्षा के लिए जगह-जगह तैनात हैं। ऐसे में पूरा बाजार बंद होने से ये दिनभर धूप में ही मोर्चे पर डटे रहते हैं। इन्हें चाय पिलाने वाला कोई भी नहीं है। यह विचार मेरे मन में आया और मैं लॉकडाउन के दिन से ही पुलिसकर्मियों को दिनभर जगह-जगह घूमकर चाय पिला रहा हूं। 

चाय पिलाने पर रोज 800 रुपए खर्च


'राजा हिन्दुस्तानी' ने बताया कि रोजाना चाय पिलाने में करीब 700-800 रुपए खर्च हो जाते हैं। उसने बताया कि जब मैं जिस क्षेत्र से निकलता हूं तो वहां मौजूद पुलिसकर्मी शुरू में तो मुझसे कई सवाल करते थे। लेकिन, जब मैं उन्हें चाय पिलाकर अपना मंतव्य बताता था तो वे मुझे शाबाशी देते थे। अब पुलिसकर्मी मुझे पहचानने लग गए हैं। अब वे रोज मेरे आने की राह देखते रहते हैं। कई बार मैं थोड़ा सा लेट हो जाता हूं तो वे मुझे फोन कर कुशलक्षेम भी पूछ लेते हैं। 'राजा हिन्दुस्तानी' ने बताया कि मैंने कर्ज लिए 50000 रुपए धीरे-धीरे मेहनत करके किश्तों में चुका दूंगा। मैं चाहता था कि इस लॉकडाउन में लोगों की सेवा करने का सौभाग्य प्राप्त करूं। 


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