ऑस्ट्रेलिया में पर्यावरण को खतरा बने जंगली घोड़े...मारने पर फिर भी प्रतिबंध

जस्ट टुडे
कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया में फारल नामक जंगली घोड़ों की एक नस्ल प्रतिष्ठित स्नोई पर्वत अल्पाइन क्षेत्र के साथ ही पर्यावरण को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है। वहां के वैज्ञानिकों ने भी पर्यावरण को क्षति पहुंचने की पुष्टि की है। इसके बाद एक सरकारी रिपोर्ट में इन जंगली घोड़ों को मारने की सिफारिश की गई थी। इसके बावजूद वहां की सरकार ने हजारों जंगली घोड़ों को मारने के बजाय उनकी कानूनी रूप से रक्षा करने का संकल्प लिया है। सरकार इस दिशा में तेजी से कार्य कर भी रही है।

यह थी सरकारी सिफारिश


न्यू साउथ वेल्स के डिप्टी प्रीमियर जॉन बरिलारो ने कहा कि उनकी सरकार ने कोसियुस्को राष्ट्रीय उद्यान पर घोड़ों के प्रभाव के बारे में पारिस्थितिक चिंताओं के बारे में संतुलित प्रतिक्रिया दी है। एक सरकारी रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि पार्क के 6000 जंगली घोड़ों में से करीब 90 प्रतिशत को मारना आवश्यक है। ऐसा होने से जंगल के 6900 किमी. के दायरे में करीब 600 घोड़ों के झुण्ड को कम कर देगा। इससे पर्यावरण को खतरा कम होगा। 

...तो घोड़ों को मारना होगा अपराध

प्रीमियर बरिलारो ने कहा कि इस सप्ताह राज्य संसद में कानून पेश किया जाएगा, जिससे पार्क में जंगली घोड़ों के विरासत मूल्य को पहचाना जाएगा और उनके मारने पर प्रतिबंध लगाया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जहां पर जंगली घोड़ों से पर्यावरण को ज्यादा नुकसान हो रहा है, वहां से उन्हें सुरक्षित जगह स्थानान्तरित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि घोड़ों के कुछ समर्थकों का कहना है कि हम घोड़ों और पर्यावरण दोनों को ही बचा सकते हैं, वहीं दूसरे लोगों का तर्क है कि ऐसा करने से पर्यावरण की रक्षा में कहीं देर ना जाए। हालांकि, सरकार का नजरिया संतुलित है।

बचाने के पीछे भावनात्मक पहलू भी


उन्होंने कहा कि इन घोड़ों का निवास स्थान अभी तक राष्ट्रीय उद्यान में स्नोई नदी के पास ही रहता है। इसलिए घोड़ों को संरक्षित रखने के पीछे एक भावनात्मक तर्क भी है। उन्होंने कहा कि लगभग दो शताब्दियों तक ये घोड़े ऑस्ट्रेलियाई सीमावर्ती हिस्सों में लोककथाओं के अभिन्न अंग रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया की सबसे प्यारी कविताओं में से एक 'द मैन फ्रॉम स्नोई रिवर' है। इस कविता में इन घोड़ों के लिए खतरा बने एक घुडसवार के बारे में बताया गया है। जो पहाड़ के नीचे उनका पकडऩे के लिए पीछा करता है। बंजजो पैटरसन की इस कविता को पहली बार वर्ष 1890 में प्रकाशित किया गया था। इसी से प्रेरित होकर 20 वीं शताब्दी में फॉक्स फिल्म ने इस पर मूवी बनाई। वर्ष 2000 में सिडनी में आयोजित ओलम्पिक में ऑस्ट्रेलियाई विरासत के रूप में भी इस जंगली घोड़े को प्रदर्शित किया गया था।

इनका संरक्षण दूसरी प्रजातियों के लिए खतरा

हालांकि, ऑस्ट्रेलिया में संरक्षण समूहों ने सरकार के इस प्रस्तावित बिल का विरोध किया है, उनका कहना है कि ऐसा करके सरकार अन्य दर्जनों देशी प्रजातियों को खतरे में डाल रही है। एक स्वतंत्र वैज्ञानिक समिति का भी कहना है कि पार्क में तीन लुप्तप्राय मेढ़कों सहित करीब 20 से अधिक पौधों की प्रजातियां और सात पशु प्रजातियां इन जंगली घोड़ों की वजह से खतरे में है। न्यू साउथ वेल्स के नेशनल पार्क एसोशिएसन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एलिक्स गुडविन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय एक अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी है। 


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