क्या रेपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट से देश को हुआ आर्थिक नुकसान?

रेपिड एंटीबॉडी टेस्ट की कीमत से सम्बंधित विवाद पर आईसीएमआर ने पेश किया तथ्य

जस्ट टुडे
नई दिल्ली। राजस्थान सहित अन्य राज्यों की आपत्ति के बाद आईसीएमआर ने रेपिड एंटीबॉडी टेस्ट किट पर रोक लगा दी थी। इसके बाद राजस्थान सहित देशभर में रेपिड किट से कोरोना जांच नहीं हो रही है। इसके बाद इस टेस्ट किट की कीमत और इससे हुए नुकसान की बात होने लगी। इसकी खरीद से हुए नुकसान पर आईसीएमआर ने अब पूरी जानकारी दी है। आईसीएमआर ने कहा कि यह खरीद तब की जा रही है जब वैश्विक रूप से इन टेस्ट किटों की भारी मांग है और विभिन्न देश इन्हें खरीदने के लिए अपनी पूरी मौद्रिक और राजनयिक ताकत का उपयोग कर रहे हैं।
आईसीएमआर ने कहा कि इन किटों को खरीदने के लिए पहले प्रयास में आपूर्तिकर्ताओं से कोई जवाब नहीं मिला। दूसरे प्रयास में कई आपूर्तिकताओं ने कई प्रतिक्रियाएं दीं। इसके बाद संवेदनशीलता और विशिष्टता का खयाल रखते हुए 2 कम्पनियों (बायोमेडेमिक्स एवं वोंडफो) के किटों की खरीद निश्चित की गई। दोनों के पास अपेक्षित अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन थे।


सबसे कम बोली पर किया विचार


वोंडफो के लिए मूल्यांकन समिति को 4 बोलियां प्राप्त हुईं। इसके बाद इन बोलियों में 1204 रुपए, 1200 रुपए, 844 रुपए और 600 रुपए थी। इसके बाद 600 रुपए की बोली पेशकश कर एल-1 के रूप में विचार किया गया।
इस बीच, आईसीएमआर ने सीजीआई के जरिए सीधे चीन की वोंडफो कम्पनी से भी किटों की खरीद की कोशिश की। प्रत्यक्ष खरीद के प्राप्त कोटेशन के निम्न मुद्दे थे।

- कोटेशन लॉजिस्टिक्स मुद्दों पर बिना किसी प्रतिबद्धता के एफओबी (फ्री ऑन बोर्ड) था।
- कोटेशन बिना किसी गारंटी के 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष अग्रिम के आधार पर था।
- समय-सीमा को लेकर कोई गारंटी नहीं थी।
- दरों को अमरीकी डॉलर में संप्रेषित किया गया, जिसमें मूल्यों में उतार-चढ़ााव के अंकेक्षण के लिए कोई खण्ड नहीं था।
- इसलिए, किटों के लिए भारत के लिए वोंडफो के विशिष्ट डिस्ट्रिब्यूटर का फैसला किया गया, जिसने अग्रिम के बिना किसी खण्ड के एफओबी (लॉजिस्टिक्स) के लिए एक सर्व समावेशी कीमत को उद्धत किया।


किट का अभी तक नहीं किया भुगतान

ऐसी किटों की खरीद के लिए किसी भारतीय एजेंसी द्वारा अब तक ऐसा पहला प्रयास था और बोलीकर्ताओं द्वारा दी गई दर ही एकमात्र संदर्भ बिन्दु थी। कुछ आपूर्तियों की प्राप्ति के बाद, आईसीएमआर ने एक बार फिर प्रक्षेत्र स्थितियों में इन किटों पर गुणवत्ता जांच संचालित की है। उनके निष्पादन के वैज्ञानिक मूल्यांकन के आधार पर दूसरे निर्माण के सम्बंध में उन्हें कम प्रभावकारी पाते हुए विवादास्पद आर्डर (वोंडफो) रद्द कर दिया गया है।
यह ध्यान देने वाली बात है कि आईसीएमआर ने इन आपूर्तियों के सम्बंध में अभी तक कोई भी भुगतान नहीं किया है। नियत प्रक्रिया का पालन करने के कारण (100 प्रतिशत अग्रिम भुगतान राशि के साथ खरीद न करने)भारत सरकार को एक भी रुपए का नुकसान नहीं हुआ है।


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