दक्षिण अफ्रीका में भू-माफियाओं से लडऩे के गुर सीख रहे किसान

जस्ट टुडे
दक्षिण अफ्रीका। भू-माफियाओं, रसूखदारों की ओर से किसानों की भूमि पर कब्जा करने की घटनाएं तो आप सभी ने खूब सुनी होंगी। इस तरह की घटनाएं रोजाना खबरें बनती हैं, वहीं बेचारे किसान कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते रहते हैं। लेकिन, उन्हें न्याय नहीं मिल पाता है...यहां की सरकार भी उनकी सुनवाई नहीं करती है। किसानों के ऐसे हालात हमारे देश-प्रदेश ही नहीं बल्कि विदेशों तक ऐसे ही हैं। लेकिन, वहां की सरकार का रवैया भी ढुलमुल रहता है, वे वादे तो करते हैं, लेकिन, उनको पूरा करने मे काफी समय लगा देते हैं। यानी देश हो या विदेश राजनेताओं के भरोसे रहना ठीक नहीं है। दक्षिण अफ्रीका में भी काफी संख्या में वे किसान परेशान हैं, जो काले रंग के हैं। इन लोगों का आरोप है कि उनकी जमीन को सफेद रंग वाले किसानों ने जबरदस्ती छीन लिया है। हालांकि, काले रंग के किसानों को सरकार ने इंसाफ देने का वादा किया हुआ है, लेकिन सफेद किसान अब उन पर हमला कर उनकी हत्या कर रहे हैं। दक्षिण अफ्रीका के काले रंग के किसानों के दर्द की पूरी दास्तान....उनकी जुबानी। 

इसलिए हो रही हिंसा


दक्षिण अफ्रीका में किसानों की जमीन पर कब्जा करने की घटनाएं दिन-प्रतिदिन आम हो रही हैं। यह मुद्दा वहां की सरकार के सामने भी ज्वालामुखी सरीख खड़ा है। वहां पर सफेद रंग के किसान जबरन काले रंग के किसानों की भूमि हथिया रहे हैं। इसके लिए वे हिंसा का भी सहारा ले रहे हैं। ऐसे में काले रंग के किसानों ने अपने इस दर्द को सरकार के सामने बयां किया। सरकार ने काले रंग के किसानों को सफेद किसानों से उनकी जमीन वापस दिलाने का पूरा आश्वासन दे रखा है। पूरी सरकार इस तरह के मामलों से निपटने पर कार्य भी कर रही है।
लेकिन, अब भू-माफिया किस्म के इन लोगों ने हिंसा का रास्ता अख्तियार कर लिया है। सफेद रंग के किसान हथियार के दम पर काले रंग के किसानों को डरा रहे हैं। काले रंग के किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह का कहना है कि इस तरह के विवाद ग्रामीण क्षेत्रों में हिंसा का कारण बन रहा है। उनका कहना है कि ऐसे में हम हर बार पुलिस के पास तो नहीं जा सकते हैं। भू-माफियाओं के जानलेवा हमले के चलते लोग बुरी तरह से डरे हुए हैं। इन किसानों का कहना है कि भू-माफियाओं ने हमें भगाने के लिए अब हिंसा का सहारा लेना शुरू कर दिया है। 

आत्मरक्षा के सिखा रहा गुर

इन लोगों के लिए इजरायल का पूर्व सैनिक इडान अबोलनिक मसीहा बनकर आया है। यह सैनिक इन किसानों को विशेष प्रशिक्षण देकर आत्मरक्षा के गुर सिखा रहा है, जिससे ये किसी भी हमले का जवाब दे सकें। सैनिक इन किसानों को 'कलाह युद्ध' में प्रशिक्षित कर रहा है। इस युद्ध में हाथ से मुकाबला करना और हथियार चलाना प्रमुख रूप से शामिल है। इसके लिए इस सैनिक ने नकली घर बनाए और उन पर आक्रमण, हिंसक हमले कर किसानों को बचने और उसका मुंहतोड़ जवाब देने की कला सिखाई जा रही है। इसके लिए सैनिक किसानों के समूह को प्रशिक्षण दे रहा है, जिससे सभी साथ लड़ेंगे तो परिणाम ज्यादा अनुकूल होंगे। हथियार चलाना सिखाने के लिए राजधानी प्रिटोरिया के पास स्थित एक क्लास रूम को शूटिंग रेंज बना रखा है।

पिछले साल 638 किसानों की हत्या

इस तरह से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे किसान और उनके परिजन खुश हैं। उनका कहना है कि वे अब हिंसा से डरने के बजाय उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। इस तरह के प्रशिक्षण से हमें भावानात्मक रूप से सम्बल भी मिला है। हमें अब खुद पर भरोसा हो रहा है कि हम अब किसी ने डरने वाले नहीं है। उन्होंने कहा कि अब हमारे रोने के दिन गए। अब हम अपने दुश्मनों को रूलाएंगे। उन्होंने कहा कि इससे पहले हम आए दिन हिंसा से परेशान थे। हम यह सोचकर ही भयभीत हो जाते थे कि अब अगला शिकार कौन होगा। 
आंकड़ों पर गौर करें तो दक्षिण अफ्रीका में पिछले साल कुल 638 कृषि हमले हुए। किसानों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूह का कहना है कि आंकड़ों से पता चलता है कि किसानों के खिलाफ हिंसक घटनाओं की कितनी अधिक संख्या है। उन्होंने कहा कि वर्तमान हत्या की प्रवृत्तियों से संकेत मिलता है कि ऐसे ही चलता रहा तो हम खेतों में ही लोगों को खो देंगे। 


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