चार धाम में बसा एक ही नाम...राधा का श्याम

ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा: सांगानेर से 14 सदस्यों ने 8 दिन की यात्रा में किए कान्हा की क्रीडा...कृष्ण की लीलाओं के दर्शन 


गुलाबचंद कुमावत @ जस्ट टुडे
जयपुर। वृन्दावन के कान्हा, माखनचोर, गोविन्द, गिरिराज जैसे असंख्य नामों से अमिट पहचान रखने वाले कन्हैया के दर्शनों को सांगानेर से 14 सदस्य ब्रज चौरासी पहुंचे। हृदय में कन्हैया का सुमिरण करते हुए इन सभी ने ब्रज स्थित 84 कोस की परिक्रमा पूरी की। इस 8 दिवसीय यात्रा का शुभारंभ मोती डूंगरी स्थित गणेश जी के दर्शनों से हुआ। विघ्नहर्ता के दर्शन करने के बाद सभी सदस्य यात्रा के लिए गिरिराज धाम के लिए रवाना हुए। वहां से रोजाना गिरिराज भगवान के दूध चढ़ाकर वैदिक मंत्रोच्चार से पूजा-अर्चना कर यात्रा का शुभारम्भ किया। करीब छह दिन में ब्रज चौरासी कोस की यात्रा पूरी कर सभी सदस्य जयपुर पहुंचे।


यमुना मैया का ले आशीर्वाद शुरू की यात्रा

सांगानेर निवासी गुलाब चंद कुमावत और सरोज कुमावत ने बताया कि मथुरा स्थित यमुना घाट पर द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन किए। फिर विश्राम घाट पर यमुना जी का पूजन कर चौरासी कोस की परिक्रमा शुरू की। समाज सेवी सुरेश बम्ब और राजकुमारी ने बताया कि इस अवसर पर सोंख रोड स्थित श्री कृष्ण कुण्ड, धु्रवनारायण मंदिर, मधुवन, महारास लीला, कपिल भगवान मंदिर, गंगासागर कुण्ड, कुमुदिनी कुण्ड, शांतनु कुण्ड, कृष्ण भगवान के सखा कुम्भन दास जी की तप स्थली, श्री चंद्र सरोवर, सूर श्याम गौशाला, सूरदास जी की समाधि, कदम्ब वृक्ष, चतुर्भुज मंदिर, पूछरी का लोठा, नवल अप्सरा कुण्ड, नृसिंह मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर, जातिपुरा स्थिति मुखारविंद व मुखराई स्थित राधा जी का ननिहाल के दर्शनों से सभी यात्रियों का मन प्रफुल्लित कर दिया।


हर जगह बस श्याम ही श्याम

समाजसेवी रमेश चन्द्र गुप्ता और गीता देवी ने बताया कि दानघाटी पर श्री गिरिराज भगवान के दर्शन कर श्याम ढांक तीर्थ, डींग स्थित लक्ष्मण मंदिर, आदि बद्रीनाथ धाम, गंगोत्री, यमुनोत्री, लक्ष्मण झूला, हरिद्वार, हर की पौडी, राम झूला, केदारनाथ के दर्शन कर कामा स्थिति चरण पहाड़ी, मंदिर श्री चंद्र मोहन जी, मदन मोहन जी, मंदिर श्री वृंदारानी, गोविंद देवजी, जगन्नाथजी, चित्रगुप्त, विमल कुण्ड व सिद्ध पीठ विमला देवी मन्दिर, रामेश्वरम् धाम, कामेश्वर महादेव, भोजन थाली के दर्शन किए। इनके दर्शन मात्र से यात्रा से थके हुए शरीर में फिर से नव स्फूर्ति का संचार हो गया।

राधा रानी में भी श्याम के दीदार

समाजसेवी कैलाश चंद्र शर्मा व गायत्री देवी ने बताया कि बरसाना स्थित कुशल बिहारी व राधा रानी के दर्शन कर मान मंदिर, मोर कुटीर, ऊंचा गांव, ललिता सखी, चरण मंदिर, घेवर वन व घेवर कुण्ड, राधा रसबिहारी मंदिर, आश्वेशर महादेव, केर कदम कुण्ड, कीर्ति मंदिर, नंदगांव व नंद महल, कोसी दुर्गा माता मंदिर, गोमतेश्वर महादेव व गोमती कुण्ड, द्वारकापुरी व बिहारी जी मंदिर, कोकिलावन में शनि मंदिर के दर्शन किए।

इनके दर्शनों से मन हुआ अभिूभूत
समाजसेवी गोपाल धामाणी व रतन देवी ने बताया कि बांके बिहारी जी के दर्शन कर राधा बल्लभ, निधि वन, सेवा कुंज, राधारमण, राधारानी, कृष्ण राधा, मानसरोवर कुंज, गोपेश्वर महादेव, भांडरी वन में राधा-कृष्ण का विवाह स्थल, बंसीवट, वेलवन, महालक्ष्मी गोपाल मंदिर, टाटिया स्थान, कात्यायनी पीठ, रंगजी का मंदिर, प्रेम मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर के दर्शन किए।


हर जगह कान्हा का जलवा

समाजसेवी सोभाग जसोरिया व संतोष देवी ने बताया कि बाटी स्थित बहुलावन कुण्ड व ब्हुला गाय, हनुमान जी मघेरवाले, बलदेव मंदिर, श्रीनाथजी, चौमुहा ब्रह्मा मंदिर व ब्रह्मकुण्ड, स्वामी कार्तिकेय मंदिर, खेलन वन, रमन बिहारी मंदिर, ऐचा दाउजी, बिहार वन, अक्षय वट, राम लखन जानकी मंदिर, चीर घाट, मधुवन बिहारी मंदिर, गरुड़ गोविंद मंदिर व मथुरा स्थित जन्म भूमि के दर्शन कर भूतेश्वर महादेव के दर्शन किए।

रावल धाम में सिर्फ आनंद का ही काम
समाजसेवी मुरारीलाल छीपा व सुमित्रा देवी ने बताया कि मथुरा स्थित लोहवन में कृष्ण कुण्ड वाली माता का मन्दिर, गोपीनाथजी, राधा जी की जन्म स्थली रावल धाम, चंद्रावली माता, बलदेव गांव में दाऊजी का मंदिर, बंदी गांव में बंदी व आनंदी व मनोवांछा देवी का मंदिर, महावन में चिंताहरण महादेव, ब्रह्मांड घाट, उखल बंधन, चौरासी खंभा, गोकुल में रमनरैती, गौकुल धाम, मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर के दर्शन कर विश्राम घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार से यमुना जी की पूजना-अर्चना कर यात्रा का समापन किया।


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