'ब्लैक' में बिक रही 'मौत की पुडिय़ा'

गुटखा, तम्बाकू, जर्दा, खैनी, नटराज जैसे कई प्रॉडक्ट की हो रही कालाबाजारी, थोक विक्रेता से लेकर रिटेलर जमकर कूट रहे चांदी



जस्ट टुडे
जयपुर। धीमे 'जहर' के नाम से मशहूर गुटखा, तम्बाकू, जर्दा, खैनी, नटराज जैसे कई प्रॉडक्ट लॉकडाउन के दौरान 'ब्लैक' में बिक रहे हैं। जानकारों का कहना है कि लॉकडाउन में लोग 'जहर' को भी नहीं छोड़ रहे हैं, इसके प्रति लोगों की दीवानगी लॉकडाउन में लगातार बढ़ी ही है। ऐसे में इसने भी एक प्रेमिका की तरह अपने दीवानों से व्यवहार किया है। प्रेमिका की तरह ही यह अपने दीवानों की जेब को जमकर ढीली करवा रहा है।  इस 'जहर' रूपी प्रेमिका के लिए लोग अपनी गाढ़ी कमाई को पानी की तरह लुटा रहे हैं। 


चौगुने दामों पर बिक रहा



जानकारों का कहना है कि आम दिनों में जो 'जहर' रूपी गुटखा, तम्बाकू, जर्दा, नटराज और खैनी पांच रुपए में आते थे, वह अब 20-25 रुपए में बिक रहा है। वहीं 10 रुपए कीमत वाला  'जहर' अब 40-45 रुपए तक में बिक रहा है। यानी इस  'जहर' के लिए लोग इतने दाम आसानी से खर्च कर रहे हैं। दुकानदारों का कहना है कि कई ग्राहक तो एडवांस रुपए देकर जाते हैं और 'जहर' आते ही तुरन्त लेने आ जाते हैं।


थोक विक्रेता काट रहे चांदी



दुकानदारों के मुताबिक लॉकडाउन में  'जहर' की आपूर्ति ठप होने से इसके दामों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। थोक विक्रेता भी 'जहर' के जरिए जमकर चांदी कूट रहे हैं। पहले 'जहर' का जो पैकेट 120 रुपए में आता था, वह अब 250-300 रुपए में मिल रहा है। ऐसे में जब थोक विक्रेता दोगुने से ज्यादा मुनाफा कमा रहे हैं तो वहीं रिटेलर्स भी इसके जरिए अपना मुनाफा कमा रहे हैं।


एडवांस देकर खरीद रहे  'जहर'


जानकारों का कहना है कि जब चीनी, चावल, आटा जैसे रोजाना काम आने वाली वस्तुओं पर प्रति किलो एक रुपए दाम बढ़ जाते हैं तो लोग महंगाई होने की बात करते हैं। वहीं पांच रुपए के 'जहर' के चौगुने दाम देने के बाद भी लोग महंगाई की बात नहीं कह रहे हैं बल्कि एडवांस पैसे देकर  'जहर' को खरीद रहे हैं।


 'जहर' बेचने वालों के मारा जाए छापा



लॉकडाउन में पुलिस का पहरा होने के चलते दुकानदार चोरी-छिपे 'जहर' को खरीद कर ला रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि लोग इसे खाना छोड़ देंगे तो इसकी कीमत अपने आप ही कम हो जाएगी। लोगों को इस समय समझदारी से काम लेना चाहिए और 'जहर' के लिए अपने पसीने की कमाई को खर्च ना करें। साथ ही प्रशासन को भी ऐसे थोक विक्रेताओं के यहां छापा मारकर 'जहर' को जब्त कर लेना चाहिए।


यूपी में गुटखा फैक्ट्री बंद, इसलिए कालाबाजारी


जानकारों का कहना है कि ज्यादातर गुटखा उत्तरप्रदेश में बनते हैं। यूपी की योगी सरकार ने लॉकडाउन में गुटखा उत्पादन और बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया है। ऐसे में गुटखा फैक्ट्री बंद पड़ी है। ऐसे में थोक विक्रेताओं के यहां जो गुटखा का भंडार था। वे अब इसकी कालाबाजारी कर रहे हैं। 


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