अल्ट्रावायलेट किरणों का भी नहीं कोरोना पर असर

जस्ट टुडे
एमीलिया नीरनबर्ग। अभी तक ऐसी खबरें आ रहीं थीं कि सूरज की किरणों, सफाई में काम आने वाली चीजों और ब्लीच से कोरोना का इलाज संभव है। लेकिन, वैज्ञानिकों की राय इस आम राय से जुदा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बात के कोई सबूत नहीं मिले हैं कि ये सभी चीजें कोरोना का खात्मा कर सकती हैं।



स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी में मेडिसिन के प्रोफेसर डॉक्टर डीन विंस्लो का कहना है कि आमतौर पर जिन चीजों से दूर रहने की हिदायत दी जाती है, ऐसे खतरनाक समय में उन्हीं चीजों के इंसानी शरीर पर इस्तेमाल की बात हो रही है। यह बहुत ही डराने वाली बात है। 

शोध और विशेषज्ञों का यह है कहना


कनेटिकट यूनिवर्सिटी के इकोलॉजिकल मॉडलर्स की एक स्टडी के मुताबिक अल्ट्रावॉयलेट लाइट से वायरस के बढऩे के स्तर में कमी आती है। हालांकि, इस स्टडी की अब तक समीक्षा नहीं की गई है। एक्सपट्र्स इस बात की चेतावनी दे चुके हैं कि अल्ट्रावॉयलेट लैंप डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं और स्वस्थ्य सेल को कैंसर में बदल सकते हैं। स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में चर्मरोग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर जस्टिन बताते हैं कि रेडिएशन शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी नुकसान पहुंचा सकती हैं। 


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