कोरोना ने 'मीठी ईद' की मिठास की फीकी

- सांगानेर बाजार में ईद की खरीददारी करने निकले लोग, रौनक रही गायब

- कोरोना संक्रमण के चलते सिर्फ खाने-पीने का ही खरीदा सामान

- कपड़े, बर्तन, जूते सहित अन्य दुकानों से ग्राहकों ने बनाई दूरी 


सांगानेर बाजार से जस्ट टुडे की लाइव कवरेज


सांगानेर बाजार में ईद पर दिखी ग्राहकों की चहल-पहल। 

जस्ट टुडे
जयपुर। ईद के ऐलान के बाद बाजारों में भी खरीददारी तेज हो गई है। रविवार को सांगानेर के बाजारों में दो माह के बाद इतने ग्राहक एक साथ देखे गए। तेज धूप होने के बाद भी सांगानेर बाजार में खरीददारी करने लोग निकले। सेवईं तथा खाद्य सामग्री के अलावा महिलाओं ने चूडिय़ां और अन्य शृंगार के सामान खरीदे। हालांकि, ईद की खरीददारी पर इस बार कोरोना का साया साफ दिख रहा है। लॉकडाउन के चलते त्योहार की धूम इस बार वैसी नहीं है, जैसी सामान्य दिनों में होती थी। फिर भी कई लोग कुर्ते, टोपियां और अरबी रूमाल आदि खरीदते दिखे। इस दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने और सोशल डिस्टेंसिंग की पालना कराने के लिए सांगानेर बाजार में कई जगह पुलिसकर्मी भी मुस्तैद दिखे।


लॉकडाउन ने खराब कर दी आर्थिक स्थिति



कागजी मोहल्ले के पास स्थित दुकानों से सेवईं खरीदते लोग। 

सांगानेर के स्थानीय निवासियों ने जस्ट टुडे को बताया कि कोरोना की वजह से लगे लॉकडाउन ने आर्थिक स्थिति खराब करके रख दी है। लॉकडाउन के दौरान काम-धंधे बंद रहने से जो पैसा बचत का था, वह खाने-पीने में खर्च हो गया। ऐसे में ईद पर खरीददारी के लिए रुपए कहां से लाएं। ईद की खरीददारी कर रहे एक व्यक्ति ने कहा कि इस बार सिर्फ बच्चों के लिए ही थोड़ा बहुत सामान दिलवा रहे हैं, क्योंकि, बच्चे नासमझ होते हैं। कोरोना के चलते इस बार खर्च करने के लिए पैसे ही नहीं है। इसलिए बड़े लोग अपने लिए किसी भी तरह की खरीददारी नहीं कर रहे हैं। एक व्यक्ति ने कहा कि हम किराए पर रहते हैं, ऐसे में दो माह का किराया और बिजली का बिल ही अभी तक नहीं दिया। क्योंकि, काम-धंधे सब बंद थे। अब तो जैसे-तैसे खाने का सामान का जुगाड़ कर रहे हैं। ईद पर सिर्फ सेवइयां ही लेने आया हूं। 


सांगानेर मुख्य बाजार स्थित मुकेश मसाला से खान-पान सहित जरूरत का सामान लेते ग्राहक।


धर्मगुरुओं के साथ जस्ट टुडे का भी पैगाम

कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार मुस्लिम धर्मगुरुओं ने कहा है कि मस्जिदों में पांच लोग ही नमाज अदा करेंगे। बाकी लोग अपने घरों में ही ईद की नमाज अदा करें। घरों में शुक्राने की नमाज अदा करने के बाद शरीयत अनुसार तमाम लोग आपस में गले मिलते हैं, पर इस बार सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए और धर्मगुरुओं की अपील के बाद जुबानी सलाम या दिल पर हाथ रखकर मुबारकबाद दी जाएगी। जस्ट टुडे भी सभी मुस्लिम भाईयों से अपील करता है कि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए ही अपनों को खुशियां बांटे। 


गले मिल नहीं बांट सकेंगे खुशियां



रमजान में इबादत के साथ अब ईद अलग अंदाज में दिखेगा। इस्लाम के इतिहास में शायद पहली बार ऐसा होगा की ईद का रंग बदला होगा। कोरोना संक्रमण के डर के साये में रवायतों से लेकर ईद की खुशी अलग दिखेगी। हर साल ईद के मौके पर परवान चढऩे वाले कई रिवाज इस बार के त्योहार का हिस्सा नहीं होंगे। लोग ईद की खुशी को गले मिलकर बांट नहीं सकेंगे। मुस्लिम बहुल इलाकों से लेकर बाजार तक रौनक नहीं होगी। मस्जिद और ईदगाह में प्रशासन के निर्देश के मुताबिक 5 लोग ही नमाज पढ़ पाएंगे। मगर यहां न मेला लगेगा, न नए कपड़े होंगे, न ही ईद मिलन की रस्म होगी। गलियां सूनी होंगी, उनमें सजावटी चांद सितारे नहीं दिखेंगे। इस बार की ईद कुछ ऐसी ही मनेगी।


नहीं मिल पाएगी ईदी

लॉकडाउन की वजह से लोग ईद पर अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के घर नहीं जा पाएंगे। स्थानीय निवासियों ने बताया कि ईद इस बार फीकी रहेगी। बच्चे पूछ रहे हैं कि इस बार ईद पर तो रिश्तेदार नहीं आएंगे, तो उन्हें ईदी नहीं मिलेगी। 

चांद रात की अलग होती थी रौनक 

इससे पहले सांगानेर मुख्य बाजार में ईद पर अलग ही रौनक होती थी। ईद पर सांगानेर बाजार पूरी रात गुलजार रहता था। सेवईं, नए कपड़े, सजावटी सामान लेने के लिए लोगों को हुजूम उमड़ता था। पूरे बाजार में इतनी भीड़ होती थी कि पैर रखने की जगह नहीं बचती थी। ऐसे ही शहर के अन्य इलाके भी गुलजार होते थे। अब वही इलाके और बाजार वीरान पड़े हैं। 


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