कोरोना के लेगा प्राण...धरती के स्वर्ग को मिला ऐसा 'रामबाण'

खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने दो परत वाला बनाया खादी का मास्क, जम्मू-कश्मीर से मिला 7.5 लाख मास्क का ऑर्डर

जस्ट टुडे
नई दिल्ली। खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) ने एक दो परत वाले खादी मास्क का विकास कर लिया है और उसे बड़ी मात्रा में इन मास्क की आपूर्ति करने के ऑर्डर मिले हैं। अपनी इस सफलता के साथ, केवीआईसी ने हाल ही में जम्मू और कश्मीर सरकार को 7.5 लाख खादी मास्क की आपूर्ति करने का आदेश  मिला है, जिसमें 5 लाख मास्क जम्मू जिले को, एक लाख चालीस हजार पुलवामा जिले को, एक लाख उधमपुर जिले और 10,000 कुपवाड़ा जिले को दिए जाएंगे। इन मास्क की आपूर्ति 20 अप्रैल तक इन जिलों के विकास आयुक्तों को की जाएगी। कॉटन के दोबारा इस्तेमाल में लाए जा सकने वाले ये मास्क 7 इंच लंबे और 9 इंच चौड़े होंगे, इनमें तीन सलवटें होंगी और बांधने के लिए कोनों में चार पट्टियां होंगी।

सांस लेने में रहती है आसानी


केवीआईसी अध्यक्ष वी. के. सक्सेना ने कहा कि केवीआईसी इन मास्क के निर्माण के लिए दो परत वाले खादी कपड़े का खास तौर पर उपयोग कर रहा है, क्योंकि ये अंदर की नमी को 70 फीसदी बनाए रखने में मदद करता है, और हवा को गुजरने के लिए एक आसान मार्ग प्रदान करता है, जिस कारण से ये सबसे अच्छा, आसानी से उपलब्ध, जेब में आ सकने वाला वैकल्पिक फेस मास्क है।
सक्सेना ने कहा, ये मास्क ज्यादा विशेष इसलिए हैं, क्योंकि ये हाथ से बुने हुए खादी के कपड़े से बने हैं जो कि सांस लेने योग्य होते हैं, आसानी से उपयोग किए जा सकते हैं और धोने योग्य व बायोडिग्रेडेबल होते हैं।


10,000 मास्क रोज बन रहे

वर्तमान में जम्मू के पास नगरोटा में खादी सिलाई केन्द्र को एक मास्क सिलाई केन्द्र में बदल दिया गया है, जो प्रति दिन 10,000 मास्क का उत्पादन कर रहा है, वहीं शेष ऑर्डर श्रीनगर में या आसपास के विभिन्न स्वयं सहायता समूहों और खादी संस्थानों में बांटे जा रहे हैं।

हरियाणा और यूपी से हो रही खादी की खरीद

एक मीटर खादी के कपड़े में 10 डबल लेयर वाले मास्क बनाए जाएंगे। 7.5 लाख मास्क बनाने के लिए लगभग 75,000 मीटर खादी कपड़े का उपयोग किया जाएगा। इससे खादी कारीगरों के लिए आजीविका के अवसरों में और वृद्धि होगी। चूंकि जम्मू-कश्मीर खादी संस्थान केवल ऊनी कपड़े का उत्पादन कर रहे हैं, इसलिए हरियाणा और यूपी के खादी संस्थानों से सूती कपड़े की खरीद की जा रही है और जिला अधिकारियों से विशेष अनुमति लेकर उन्हें भेजा जा रहा है।


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